चीन की धरती पर बैठकर पाकिस्तान ने फिर कश्मीर का राग छेड़ा। सोचा था बीजिंग का सहारा लेकर भारत पर दबाव बना लेगा। लेकिन इस बार नई दिल्ली ने एक ऐसा जवाब दिया कि चीन और पाकिस्तान दोनों की बोलती बंद हो गई। कंगाल पाकिस्तान जो दुनिया भर से कर्ज मांगकर अपना देश चला रहा है, वह चीन पहुंचते ही फिर भारत के खिलाफ जहर उगलने लगा। लेकिन भारत ने साफ शब्दों में यह कह दिया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे। इतना ही नहीं भारत ने चीन के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट सीपीईसी पर भी सीधा वार कर दिया है और बीजिंग को यह याद दिलाया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरने वाला हर प्रोजेक्ट भारत की संप्रभुता पर हमला माना जाएगा।
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दरअसल बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 23 से 26 मई तक चीन दौरे पर थे। दोनों देशों के रिश्तों के 75 साल पूरे होने के नाम पर बड़े-बड़े यहां पर दावे किए गए। लेकिन असली मकसद फिर से वही था भारत के खिलाफ माहौल बनाना। चीन और पाकिस्तान की तरफ से एक संयुक्त बयान जारी किया गया जिसमें पाकिस्तान ने चीन को जम्मू कश्मीर के हालात पर ब्रीफ किया। इसके बाद चीन ने भी वही पुराना राग अलपा। कश्मीर को इतिहास से जुड़ा विवाद बताया और यूएन चार्टर और यूएससी प्रस्तावों की बात करने लगा। लेकिन चीन और पाकिस्तान शायद यह भूल गए थे कि यह नया भारत है। भारत ने तुरंत इस पूरे बयान को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने साफ कहा जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और इस मुद्दे पर टिप्पणी करने का किसी दूसरे देश को कोई अधिकार नहीं है। लेकिन असली चोट इसके बाद आई। भारत ने चीन पाकिस्तान इककोनमिक कॉरिडोर यानी कि सीपीईसी पर सीधा हमला बोल दिया। भारत ने आगे यह साफ कहा है कि सीपीईसी के कई प्रोजेक्ट्स भारत के उस संप्रभु क्षेत्र से गुजरते हैं जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। यानी कि गिलगिट, बलिचिस्तान और पीओके से गुजरने वाले इस प्रोजेक्ट को भारत ने एक तरह से पूरी तरह से अवैध बता दिया।
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सीपीसी चीन का ड्रीम प्रोजेक्ट कैसे है। करीब बता दें कि 60 बिलियन डॉलर का यह कॉरिडोर चीन के शीजियांग को पाकिस्तान के गवादर पोर्ट से जोड़ता है। इसके जरिए चीन सीधे अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है। यहां पर सड़क, रेलवे, बंदरगाह और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के जरिए पूरे इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। लेकिन भारत लगातार यह कहता आया है कि सीपीईसी भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा भारत के वैध क्षेत्र पीओके से होकर गुजरता है। इतना ही नहीं भारत ने चीन पाकिस्तान के कथित सीमा पार जल सहयोग पर भी जोरदार तंज कस दिया। नई दिल्ली ने यह साफ कहा है कि जब चीन और पाकिस्तान की कोई वैध साझा सीमा है ही नहीं तो फिर सीमा पार जल सहयोग कैसे? भारत ने 1963 के उस कथित चीन पाकिस्तान सीमा समझौते को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया। जिसमें पाकिस्तान ने कश्मीर की एक घाटी का हिस्सा चीन को सौंपा था।
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