क्या आपके बच्चे का मन भी पढ़ाई से ज्यादा फोन में लगता है? आजकल पेरेंट्स अक्सर इसी समस्या के साथ आते हैं और उन्हें समझ ही नहीं आता कि बच्चे की ये लत कैसे छुड़वाई जाए। ऐसे में प्रेमानंद जी महाराज की ये सलाह आपके बड़े काम आ सकती है।
मोबाइल में मजा ढूंढने की आदत से बचें
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, बच्चों को मोबाइल में मनोरंजन और मजा ढूंढने की आदत नहीं डालनी चाहिए। शुरुआत अक्सर छोटी होती है। बच्चा पढ़ाई के बीच मोबाइल पर गेम खेलने लगता है या सीरियल और दूसरी मनोरंजन वाली चीजें देखने लगता है। धीरे-धीरे मोबाइल पर समय बढ़ सकता है और पढ़ाई में मन लगाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं तो मोबाइल को जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करें। पढ़ाई के समय बार-बार मोबाइल देखने की आदत से बचें और अपना ध्यान उस काम पर रखें जो उस समय जरूरी है।
मोबाइल बुरा नहीं, उसका गलत इस्तेमाल परेशानी बन सकता है
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मोबाइल में केवल दोष ही नहीं हैं। मोबाइल के कई फायदे भी हैं। इसके जरिए आप किसी समस्या का समाधान ढूंढ सकते हैं, जरूरी जानकारी ले सकते हैं और दूर रहने वाले लोगों से संपर्क कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल से पुलिस से संपर्क किया जा सकता है, डॉक्टर से संपर्क किया जा सकता है। अपने रिश्तेदारों और परिचितों से भी बात की जा सकती है, फिर चाहे वे कितनी भी दूर क्यों ना रहते हों। यानी सही काम के लिए इस्तेमाल किया जाए तो मोबाइल काफी उपयोगी साधन है।
मोबाइल में गुण और दोष दोनों हैं
महाराज जी कहते हैं कि हर चीज में गुण और दोष हो सकते हैं। मोबाइल में भी दोनों मौजूद हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसका इस्तेमाल किस तरह करते हैं। अगर मोबाइल का इस्तेमाल जानकारी लेने, जरूरी लोगों से संपर्क करने और किसी काम को आसान बनाने के लिए किया जाए तो यह बहुत काम की चीज है। लेकिन अगर इसका इस्तेमाल गलत चीजें देखने या सिर्फ मनोरंजन में समय बिताने के लिए होने लगे तो यही मोबाइल परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए मोबाइल को पूरी तरह छोड़ने की बात नहीं है। जरूरत इस बात की है कि उसके अच्छे इस्तेमाल को अपनाया जाए और उसके गलत इस्तेमाल से बचा जाए।
पढ़ाई के समय मोबाइल से दूरी रखें
अगर आपको लगता है कि मोबाइल की वजह से पढ़ाई में मन कम लग रहा है, तो अपने इस्तेमाल पर ध्यान देना शुरू करें। पढ़ाई के समय मोबाइल को अपने पास रखने के बजाय थोड़ी दूरी पर रखें। जब किसी जरूरी काम के लिए इसकी जरूरत हो, तभी इस्तेमाल करें। प्रेमानंद जी महाराज की बात को ध्यान में रखते हुए यह समझना जरूरी है कि मोबाइल हमारे हाथ में रहे, ना कि हम हर समय मोबाइल के हाथों में रहें।
बात सिर्फ मोबाइल की नहीं, हमारी आदत की है
मोबाइल अच्छा है या बुरा, इसका जवाब उसके इस्तेमाल में छिपा है। एक ही मोबाइल किसी के लिए पढ़ाई और जानकारी का साधन हो सकता है, तो किसी दूसरे के लिए समय बर्बाद करने का कारण बन सकता है। प्रेमानंद जी महाराज इसी फर्क को समझाने की कोशिश करते हैं। इसलिए मोबाइल का इस्तेमाल करते समय खुद से यह ध्यान रखें कि आप इसका इस्तेमाल किसी जरूरी काम के लिए कर रहे हैं या सिर्फ मन बहलाने के लिए। सही समय पर सही इस्तेमाल किया जाए तो मोबाइल बहुत उपयोगी है। लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से बचना भी उतना ही जरूरी है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.