विकास खन्ना के अनुसार आजकल कुकवेयर घर की सजावट का हिस्सा बन कर रह गया है, जानिए कैसे प्रीमियम कास्ट आयरन के बर्तन खाना बनाने का तरीका ठीक कर सकते हैं।
विकास ने कहा, “मेरी माँ अपने पैन फेंकने को तैयार नहीं होतीं। उनके नॉन-स्टिक पैन जल चुके हैं और उनकी कोटिंग भी खराब हो गई है, लेकिन उनका कहना है कि वे अभी भी काम आ जाते हैं। लेकिन कुकवेयर और कोटिंग की सही समझ बहुत ज़रूरी है, अन्यथा ये सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए मैं इससे जुड़ी सही जानकारी लोगों तक पहुंचना चाहता हूं। सच तो ये है कि हम सेहत की परवाह किए बगैर नॉन-स्टिक पैन का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं। हम ऑर्गेनिक तरीके से उगाए गए खाने के लिए दोगुना पैसा देने को तैयार रहते हैं, मगर हमें इसका कोई अंदाजा नहीं है कि खाना बनाने के लिए किस तरह के बर्तन सुरक्षित माने जाते हैं।
उन्होंने बहुत खूबसूरती से तुलना करते हुए बताया कि पंजाब में आलू के पराठे बनाने वाला तवा हो या दक्षिण भारत में कुरकुरे डोसे बनाने वाला पैन, ये सभी लोहे के होते हैं। इस तरह के बर्तन आपके खाने को और भी मजेदार एवं स्वस्थ बना देते हैं। ये देश भर के पारंपरिक क्षेत्रीय व्यंजन हैं, लेकिन इन्हें बनाने का तरीका (बर्तन) एक ही रहता है।
“ये रेसिपी परंपराओं का हिस्सा हैं। और कभी-कभी आप परंपराओं पर सवाल नहीं उठाते क्योंकि ये कई पीढ़ियों से चली आ रही होती हैं। मुझे लगता है कि लोगों के मन में सवाल थे और उन्होंने समाधान ढूंढे, और चीज़ें बदल गईं।” यहीं से पारंपरिक बर्तन से मॉडर्न और जल्दी खाना पकाने वाले विकल्पों को ओर लोगों की रुचि बढ़ी और बदलाव शुरू हुआ। पर अब समय आ गया है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें, लेकिन एक मॉडर्न अंदाज़ के साथ।
कास्ट-आयरन पैन या कड़ाही को सही तरीके से सीज़न (seasoning) कैसे करें!
विकास ने मज़ाक में कहा, “यह उतना मुश्किल नहीं है जितना हमने इसे बनाया हुआ है। अगर आप किसी भी अन्य बर्तन का भी ध्यान नहीं रखते तो वो खराब हो जाती है या उनमें जंग लग जाता है।”
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अपने सभी बर्तनों का ध्यान रखना कितना ज़रूरी है, चाहे वह किसी भी पदार्थ से बना हो और खासकर अपने कास्ट आयरन के बर्तन के प्रति थोड़ा सचेत रहें, विशेष रूप से उन्हें इस्तेमाल करते हुए।
अपने आयरन पैन को ज़हरीले रेशों और केमिकल से न रगड़ें।
धोने के बाद पैन को अच्छी तरह सूती कपड़े से पोंछ लें और उस पर ज़रा भी नमी न छोड़ें।
इनमें खाना पकाने के लिए नमक से सीज़निंग करना बहुत ज़रूरी है। इस स्टेप को न छोड़ें।
“एक समय ऐसा आता है जब सही तरीके से सीज़निंग करने पर आपका कास्ट आयरन पैन बिल्कुल नॉन-स्टिक पैन जैसा काम करने लगता है, लेकिन नॉन-स्टिक पैन के मुकाबले इनमें खाना पकाने के कई अन्य फायदे हैं। मेरे रेस्टोरेंट में लगभग 16 डिशेज़ का लिमिटेड मेन्यू है, जिनमें से 7 कास्ट आयरन पैन पर बनाई जाती हैं। आयरन पैन से मिलने वाला ‘सियर’ (तेज़ आंच पर पकाने से मिलने वाला स्वाद और रंग) बेजोड़ होता है, और नॉन-स्टिक या स्टील पैन कभी भी वैसा काम नहीं कर सकते।”
क्या पहले की तुलना में Gen-Z के खाना पकाने के तरीके में कोई बदलाव आया है?
विकास के अनुसार, घर पर खाना पकाना कोई बोझ नहीं लगना चाहिए। आरामदायक खाने की बात करें तो (comfort cooking) खिचड़ी सबसे अच्छा विकल्प है। Gen-Z अब इस बात को लेकर ज़्यादा जागरूक हो गया है कि वे क्या खाते हैं; उन्होंने धीरे-धीरे घर पर खाना पकाने और हेल्दी खाने को फिर से फ़ैशन बना दिया है। हेल्थ के क्षेत्र में AI के इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से लोगों के खाना पकाने की सोच में भी बड़ा बदलाव आया है।
अब बात 10 बर्तन इस्तेमाल करने और घर पर अलग-अलग तरीके के डिश बनाने की नहीं रही, अब बात आसान रेसिपीज़ की है, जिन्हें स्वस्थ तरीके से झटपट तैयार का टेबल पर पड़ोस जा सकता है।
AI आ चुका है और हमारी रसोई में अपनी जगह बना रहा है। इस बारे में आपकी क्या राय है? खासकर तब, जब आपने अभी-अभी क्लासिक कुकवेयर की एक पूरी रेंज लॉन्च की है?
उन्होंने ‘माँ के हाथ का खाना’ वाले कॉन्सेप्ट का ज़िक्र करते हुए पूछा, “अगर आप अपने बच्चों को खाना खिलाना चाहें, तो क्या आप चाहेंगे कि कोई मशीन यह काम करे या आप खुद करना चाहेंगे?” मेहमान तो बस एक रूप बदलने वाला ज़रिया है। लेकिन खाना बनाते समय जो जुड़ाव आप महसूस करते हैं, वो एक तरह का ध्यान है। अपना फ़ोन बंद कर दें और खाना बनाने पर ध्यान दें। ये प्रक्रिया सच में सुकून देने वाली है और ये भी “आपके और ईश्वर” के बीच की बात है। AI आपको वो जुड़ाव कभी नहीं दे सकता।
“मेरे रेस्टोरेंट में चार अलग अलग पीढिय़ों के लोग आकर बैठते हैं और मैं उन सभी के लिए खाना बनाता हूं। ये किसी भी मशीन के काम या उसकी बनाई चीज़ से कहीं बढ़कर है। मैं खाना पकाते हुए जो महसूस करता हूं इसकी जगह कोई और नहीं ले सकता।”
भारतीय खाना पकाने की प्रक्रिया में बर्तन जान डाल देती, आखिर ये बर्तन कहां मिलते हैं?
विकास ने तुरंत जवाब दिया, भारतीय खाना पकाने की असली जान मिट्टी में है। मिट्टी के बर्तनों में पके खाने की कुछ और ही बात होती है। उन्हें तैयार करना, मिट्टी के बर्तन में खाना पकते समय उसकी खुशबू… यह सब बहुत खास और सदाबहार है।”
उन्होंने आगे कहा, कांसा और पीतल ज़्यादा सजावटी होते हैं, हालांकि कास्ट आयरन पुराने ज़माने का है, लेकिन उसे थोड़ी देखभाल की ज़रूरत होती है। अलग अलग पदार्थ से बने बर्तन की अपनी अलग भूमिका होती है और अलग-अलग समय, इलाकों और खान-पान की शैलियों में उन्हें अहमियत दी गई है। हर प्रदार्थ की छोटी-छोटी खूबियों पर ध्यान देना ज़रूरी है।
बर्तनों से जुड़ी मेरी कुछ यादें:
“मेरी दादी की कड़ाही अभी उस म्यूज़ियम में है जो मैंने मणिपाल में बनाया है। उनकी दादी ने उन्हें यह कड़ाही उनकी शादी के समय दी थी।” वे हँसे और बोले, “उसमें दोनों तरफ़ हैंडल भी नहीं थे।”
उन्होंने अपनी दादी की कुछ भूली-बिसरी रेसिपीज़ याद की, जो हमेशा सिर्फ़ उनकी कड़ाही में ही बनती थीं, कहीं और नहीं! उन्हें अपनी दादी का ‘तवा’ भी बहुत अच्छी तरह से याद था। “वे मुझे बताती थीं कि जिस दिन मेरे पिता का जन्म हुआ था, किसी ने उन्हें लोहे का तवा लाकर दिया था, और ये सचमुच कमाल की बात है कि वो इतनी पीढ़ियों तक काम आता रहा।”
बात खत्म करने से पहले, मैंने बस ये पूछा, “शेफ़, अगर मुझे लोहे का पैन मिल जाए, तो मुझे कौन सी एक डिश बनानी चाहिए?”
विकास ने कहा, “फैंसी डिशेज़ छोड़िए, कुछ आसान चुनिए और उसे अच्छे से बनाइए। ऑमलेट बनाइए, और पैन का अपना जादू देखिए!”
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