OpenAI ने किशोरों के लिए ChatGPT को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए एज प्रिडिक्शन सिस्टम और एक्सट्रा सेफ्टी फीचर्स लॉन्च किए हैं। आइए आपको इसके बारे में बताते हैं।
ChatGPT को कैसे पता चलेगा कि यूजर किशोर है?
OpenAI के अनुसार, ChatGPT उम्र का अनुमान लगाने के लिए किसी एक जानकारी पर निर्भर नहीं करता। सिस्टम अकाउंट से जुड़े अलग-अलग संकेतों का इस्तेमाल कर सकता है। इनमें यूजर किस तरह के विषयों पर बातचीत करता है, ChatGPT का इस्तेमाल किस समय और किस तरीके से किया जाता है और अकाउंट कितना पुराना है जैसी जानकारी शामिल हो सकती है।
अगर सिस्टम को लगता है कि कोई यूजर 18 साल से कम उम्र का हो सकता है, तो एलिजिबल अकाउंट पर ChatGPT for Teens का अनुभव अपने आप लागू किया जा सकता है। यूजर को इसे अलग से ऑन करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि OpenAI खुद मानता है कि कोई भी age-prediction सिस्टम पूरी तरह सटीक नहीं हो सकता। इसलिए अगर किसी 18 साल या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति को गलती से Teen एक्सपीरियंस में डाल दिया जाता है, तो वह अपनी एज वेरिफाइ कर सकता है।
भारतीय यूजर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
भारत में इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले किशोरों की संख्या काफी बड़ी है। ऐसे में AI के साथ बच्चों की बातचीत को सुरक्षित रखना जरूरी बन जाता है। भारतीय यूजर्स की भाषा, बातचीत के तरीके और इंटरनेट इस्तेमाल करने की आदतें अलग-अलग हो सकती हैं। कोई किशोर हिंदी में बात कर सकता है, कोई अंग्रेजी में और कई यूजर्स Hinglish का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में केवल भाषा या किसी एक बातचीत के आधार पर उम्र का अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
किशोर यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?
ChatGPT for Teens में सामान्य ChatGPT फीचर्स मिलते रहते हैं, लेकिन इसके साथ उम्र के हिसाब से अतिरिक्त सुरक्षा उपाय जोड़े गए हैं। इनमें संवेदनशील और संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट को कम करना शामिल है। उदाहरण के तौर पर ग्राफिक वॉयलेंस, रिस्की वायरल चैलेंजेस, सेक्सुअल या रोमांटिक रोलप्ले और एक्सट्रीम ब्यूटी स्टैंडर्ड्स या बॉडी-शेमिंग से जुड़े कंटेंट पर एक्सट्रा सावधानियां लागू की जा सकती हैं।
माता-पिता को कितना कंट्रोल मिलेगा?
OpenAI ने Parental Controls को भी इस सिस्टम का हिस्सा बनाया है। माता-पिता अपने बच्चे के ChatGPT अकाउंट को अपने अकाउंट से लिंक कर सकते हैं और कई सेटिंग्स को कंट्रोल कर सकते हैं। इनमें सेंसिटिव कंटेंट को कम करना, वॉइस मोड, इमेज जेनरेशन, मेमोरी, स्टडी मोड और क्वाइय आवर्स जैसी सेटिंग्स शामिल हैं। माता-पिता यह भी तय कर सकते हैं कि कुछ समय के दौरान ChatGPT का इस्तेमाल ना किया जा सके।
हालांकि, माता-पिता अपने बच्चे की चैट्स, चैट हिस्ट्री या रियल-टाइम एक्टिविटी नहीं देख सकते। यानी पैरेंटल कंट्रोल्स का मकसद बच्चे की पूरी बातचीत पर नजर रखना नहीं है।
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