चंडीगढ़ में एक वाहन नंबर प्लेट की कीमत ने सबको हैरान कर दिया. CH01-DD-0001 नंबर ₹53.88 लाख में बिका, जो शहर के इतिहास का सबसे महंगा फैंसी नंबर बन गया. खास बात ये है कि इसे खरीदने वाले ने इसे अपनी ₹50 लाख की Toyota Fortuner Legender के लिए लिया. आखिर क्यों इतना महंगा बिकता है VIP नंबर? पूरी कहानी जानिए.
Fancy Number Plate in Chandigarh
ये नीलामी 4 से 6 मार्च 2026 तक चली, जिसमें नई CH01-DD सीरीज (0001 से 9999 तक) के फैंसी और चॉइस नंबरों के साथ पिछली सीरीज के बचे हुए नंबर भी शामिल थे. कुल 591 नंबर बिके और इससे आरएलए को रिकॉर्ड ₹4.48 करोड़ की आय हुई, जो चंडीगढ़ में एक सिंगल नीलामी का अब तक का सर्वाधिक संग्रह (Collection) है.
CH01-DD-0001 के लिए लगी लाइन
CH01-DD-0001 नंबर के लिए जबरदस्त कंपटीशन देखा गया. ये 0001 सीरीज का टॉप नंबर होने के कारण काफी लोकप्रिय रहा, क्योंकि लोग इसे स्टेटस सिंबल, लक और प्रेस्टीज से जोड़ते हैं. पिछला रिकॉर्ड अगस्त 2025 में CH01-DA-0001 के लिए ₹36.43 लाख का था, जिसे इस नीलामी ने आसानी से तोड़ दिया. अन्य टॉप नंबरों में CH01-DD-0003 को ₹32.32 लाख और CH01-DD-0005 को भी अच्छी कीमत पर बेचा गया. पूरी लिस्ट देख लीजिए-
गाड़ी से महंगा नंबर
इस नंबर को पूर्व मेयर और भाजपा नेता दवेश मौद्गिल (Davesh Moudgil) ने खरीदा है. उन्होंने इसे अपनी Toyota Fortuner Legender (जो करीब ₹50 लाख की है) के लिए लिया. दिलचस्प बात ये है कि नंबर प्लेट की कीमत कार की कीमत से भी ज्यादा हो गई. उन्होंने बताया कि ये उनके लिए स्टेटस और पहचान का प्रतीक है और वे इसे लंबे समय से चाहते थे.
चंडीगढ़ में फैंसी नंबरों का क्रेज
पिछले कुछ सालों में चंडीगढ़ में फैंसी नंबरों का क्रेज तेजी से बढ़ा है. लोग 0001, 9999, दोहराव वाले अंक (जैसे 7777, 1111) या आसान याद रहने वाले कॉम्बिनेशन को प्राथमिकता देते हैं. आरएलए की ई-नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी है, जिसमें कोई भी पंजीकृत व्यक्ति ऑनलाइन बोली लगा सकता है. न्यूनतम रिजर्व प्राइस आमतौर पर ₹50,000 से शुरू होता है, लेकिन कंपटीशन से कीमतें आसमान छू लेती हैं.
ये घटना भारत में वाहन नंबर प्लेट बाजार की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है। दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में भी VIP नंबर करोड़ों में बिकते हैं, लेकिन चंडीगढ़ का ये रिकॉर्ड इसे दूसरे स्थान पर ला खड़ा करता है. आरएलए के इस रिकॉर्ड संग्रह से सरकारी खजाने को फायदा हुआ है और ये फंड ट्रांसपोर्ट सुविधाओं में इस्तेमाल हो सकता है.
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