अगर आपको भी हर समय ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है, स्किन पीली हो रही है, सांस फूलने या सांस लेने में समस्या रहती है या चक्कर आता है। तो एक बार आपको डॉक्टर से इसकी जांच करानी चाहिए कि कहीं यह एनीमिया का संकेत तो नहीं है। एनीमिया होने पर लोगों को गुड़, चुकंदर और रोजाना सुबह भीगी हुई किशमिश खाने की सलाह दी जाती है। वहीं किशमिश को लेकर दावा इतना ज्यादा वायरल हो रहा है कि कई लोगों का मानना है कि रोजाना सुबह भीगी हुई किशमिश खाने से खून की कमी दूर होगी। तो आइए जानते हैं इसमें कितनी सच्चाई है।
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जानें एनीमिया में किशमिश खाने के फायदे
शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं और हीमोग्लोबिन बनाने में इस्तेमाल होने वाला खनिज आयरन किशमिश में पाया जाता है। यही वजह है कि इससे एनीमिया की समस्या ठीक हो सकती है।
अगर किसी में आयरन की कमी की वजह हल्का पोषण समस्या है, तो किशमिश और आयरन से भरपूर डाइट से फायदा मिल सकता है।
लेकिन अगर शरीर में हीमोग्लोबिन कम है या शरीर में आयरन ठीक से अवशोषित नहीं हो रहा है, तो ऐसी स्थिति में सिर्फ किशमिश खाने से काम नहीं चलेगा।
भीगी किशमिश के लाभ
एनीमिया की वजह पता करना भी बेहद जरूरी है। महिलाओं में भोजन में आयरन की कमी, अधिक मासिक रक्तस्त्राव, आंतों से आयरन का कम अवशोषण या दूसरी बीमारियों की वजह से भी एनीमिया की समस्या हो सकती है। डाइट में गड़बड़ी होने से एनीमिया होने पर किशमिश से काफी हद तक सुधार हो सकता है।
भिगोकर किशमिश खाने से यह नरम हो जाती है और इसको पचाना भी आसान हो जाता है।
किशमिश के अलावा आयरन के अन्य स्त्रोत जैसे हरी बीन्स, दालें, मांस-मछली और कुछ सूखे फलों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।
इन बातों का भी रखें खास ध्यान
बता दें कि एनीमिया में सिर्फ आयरन की मात्रा नहीं बल्कि इसका अवशोषण भी जरूरी है। पशु स्त्रोतों से मिलने वाले आयरन की तुलना में पौधों से मिलने वाले आयरन का अवशोषण कम होता है।
विटामिन सी भी इसके अवशोषण को बढ़ाने में सहायता करता है। यानी की आयरन वाली चीजों को खाने के साथ-साथ अपनी डाइट में विटामिन सी को भी शामिल करना जरूरी होता है।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो गंभीर लेवल की एनीमिया में सिर्फ खाने के माध्यम में शरीर में आयरन की जरूरत को पूरा कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह और सप्लीमेंट्स लेना जरूरी हो जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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