ईरान और अमेरिका में चल रहे तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। शांति योजना पर बात नहीं बनने के बीच ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरामनिया ने कहा कि देश किसी भी टकराव के लिए पूरी तरह से तैयार है और जरूरत पड़ी तो अमेरिका को पहले से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाया जाएगा। ईरानी सेना का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होमस को दोबारा खोलने वाले 7 दिन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्होंने एक प्रस्ताव दिया था लेकिन मैंने उसे ठुकरा दिया है। ट्रंप की इन बातों के बावजूद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची ने कहा कि तेहरान क़तर और पाकिस्तान के जरिए अमेरिका के पक्के जवाब का इंतजार कर रहा है।
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सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के अनुसार अराची ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुछ अच्छी बातें भी कही हैं और कुछ उल्टी सीधी बातें भी जो दुर्भाग्य से हम उनसे अक्सर सुनते हैं। उन्होंने बातचीत से समाधान निकालने की अपील की और कहा कि हम इस अहम समुद्री जलमार्ग की रुकावट सिर्फ बातचीत से ही सुलझा सकते हैं। ब्लूमबर्ग ने मामले से जुड़े एक व्यक्ति के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान एक समझौते पर विचार कर रहे थे। इसके तहत तेहरान होमस खोल देता और वाशिंगटन ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटा देता। यह समझौता जून के बीच हुए उस समझौते जैसा होता जिसके बाद दोनों तरफ नाजुक सीजफायर हुआ था। लेकिन वो सीज फायर जल्दी टूट गया। इसी बीच शनिवार को यमन के हुती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर हमला किया। कुती विद्रोही ईरान समर्थित समूह माना जाता है। इस हमले को मध्यपुर में अमेरिका के सहयोगियों के खिलाफ ईरान की दुश्मनी बढ़ने का संकेत माना जा रहा है। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जनरल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ट्रंप उम्मीद कर रहे हैं कि नवंबर की शुरुआत में अमेरिकी मध्यावदी चुनावों के बाद वे ईरान के खिलाफ बमबारी अभियान फिर से शुरू कर देंगे। उन्हें शक है कि तेहरान उनकी मांगे पूरी करेगा जब ट्रंप से सीधा पूछा गया कि क्या वे चुनाव के बाद बमबारी फिर से शुरू करेंगे? तो उन्होंने जवाब देने से इंकार कर दिया। वहीं पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति मसूद प्रजियान ने साफ किया कि जब तक अमेरिका की प्रतिबंध और नाकेबंदी लागू रहेगी तब तक तेहरान होमस स्टेट से जहाजों की आवाजाही आजाद नहीं करेगा यानी कि होमोज स्टेट कोप नहीं खोलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान आर्थिक मकसद से परमाणु तकनीकें विकसित करने का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा।
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कुल मिलाकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब देखना यह होगा कि दोनों पक्ष आगे क्या कदम उठाएंगे। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से सऊदी अरब ने खाली क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गंभीर कदम उठाने की अपील की है। 26 सितंबर को न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि दुनिया इस समय अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने सऊदी अरब और क्षेत्र के खिलाफ ईरानी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि खाली की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था से जुड़ा मामला है। सऊदी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया जब मिडिल ईस्ट में तनाव का असर खाली से लेकर लाल सागर और बाब अलमदेव तक दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने 20 सितंबर में यमन के पश्चिमी तट पर लड़ाई तेज होने और हूतियों के बाल अलमदेव की ओर बढ़ने की रिपोर्ट दी थी।
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