… फिलेम दीपक सिंह …
नागोया, 28 सितंबर भारत की पिंकी बलहारा ने सोमवार को यहां महिला 78 किग्रा से कम भार वर्ग की कुराश स्पर्धा के सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया की सुमिन मो से 0-5 से हारकर कांस्य पदक अपने नाम किया। मुकाबले के दौरान पिंकी को ‘डक्की’ (पेनल्टी) मिली, जबकि मो ने ‘योनबोश’ अंक हासिल किया। यह एशियाई खेलों में पिंकी का दूसरा पदक है।
उन्होंने 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में महिलाओं के 52 किग्रा से कम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। उस खेल में कुराश को पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया था। इससे पहले पिंकी ने दक्षिण कोरिया की लिम गाराम को 3-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की की थी।
इस 27 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी ने निर्णायक अंक ‘चाला’ के जरिए हासिल किया, जबकि लिम पूरे मुकाबले में एक भी अंक नहीं जुटा सकीं। ‘चाला’ तब दिया जाता है, जब खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर गिराता है, लेकिन इस दांव में पूरा नियंत्रण नहीं होता। पिंकी को प्री-क्वार्टर फाइनल में बाय मिला था।
उन्होंने कहा कि क्वार्टर फाइनल में प्रतिद्वंद्वी के प्रहार से उनके घुटने में तेज दर्द हो गया था। दिल्ली के नेब सराय की रहने वाली पिंकी ने भावुक हो कर कहा, ‘‘क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मुझे चोट लग गई थी। मेरे घुटने पर चोट लगी।
क्वार्टर फाइनल में मेरी प्रतिद्वंद्वी भी कोरियाई थी। इसलिए सेमीफाइनल में मेरी प्रतिद्वंद्वी को पता था कि मेरे दाएं घुटने में चोट लगी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आक्रमण कर रही थी, लेकिन वह बार-बार मेरे घुटने पर प्रहार कर रही थी। इसलिए मैं पेनल्टी के कारण हार गई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘78 किग्रा वर्ग में यह मेरा सिर्फ दूसरा मुकाबला था।
इससे पहले मैंने मई में उज्बेकिस्तान में एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। 78 किग्रा वर्ग में वह मेरा पहला मुकाबला था।’’
पिंकी दिल्ली के मुनिरका स्थित बाबा गंगा नाथ जूडो एवं कुराश अकादमी में प्रशिक्षण लेती हैं। इस अकादमी का संचालन उनके मामा और जाने-माने जूडो एवं कुराश कोच समुदंर टोकस करते हैं।
उन्होंने नौ साल की उम्र में जूडो से शुरुआत की थी। कुराश मध्य एशिया, खासकर उज्बेकिस्तान में प्राचीन समय से चली आ रही पारंपरिक मार्शल आर्ट है। इसमें दो खिलाड़ी मुकाबला करते हैं, जिनमें एक हरे और दूसरा नीले रंग की जैकेट पहनता है।
इसका उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर पटकना होता है। प्रतिद्वंद्वी को अगर पीठ के बल गिराया जाता है तो जीत घोषित कर दी जाती है जबकि पेट या बगल के बल गिराने पर अंक दिए जाते हैं। सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता होता है।
इस खेल में जमीन पर दांव-पेंच, गला दबाने और जोड़ पर पकड़ बनाने जैसी तकनीकें प्रतिबंधित हैं। मुकाबले का फैसला केवल खड़े होकर किए जाने वाले थ्रो के आधार पर होता है।
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