20वीं सदी के सबसे बेहतरीन गीतकार और कवि में से एक रहे साहिर लुधियानवी का 08 मार्च को जन्म हुआ था। साहिर के गीतों और शायरी को आज भी लोग खूब पसंद करते हैं। उन्होंने अपने गीतों और शायरियों के जरिए जुल्मों और गैर-बराबरी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। साहिर लुधियानवी शब्दों के सच्चे जादूगर थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर साहिर लुधियानवी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
पंजाब के लुधियाना के करीमपुरा में 08 मार्च 1921 को साहिर लुधियानवी का जन्म हुआ था। वह एक पंजाबी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते थे। साहिर का असली नाम अब्दुल हई है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा लुधियाना से पूरी की। कॉलेज टाइम से ही वह अपने शेर और शायरी के लिए फेमस हो गए थे। साहिर एक भारतीय कवि और संगीतकार थे। उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए तमाम गाने भी लिखे।
इसे भी पढ़ें: Paramahansa Yogananda Death Anniversary: UP के मुकुंद कैसे बने पश्चिम में ‘Father of Yoga’, बड़ी-बड़ी हस्तियां बनीं शिष्य
करियर की शुरूआत
साहिर लुधियानवी ने अपने काम से फिल्म जगह में अच्छी जगह बनाई थी। साल 1949 में आई फिल्म ‘आजादी की राह’ से उन्होंने अपने करियर की शुरूआत की थी। इस फिल्म के लिए उन्होंने 4 गाने लिखे थे। फिर साल 1951 में आई फिल्म ‘नौजवान’ के लिए साहिर ने गाने लिखे। उनको सबसे अधिक सफलता साल 1951 में आई फिल्म ‘बाजी’ से मिली थी। इन गानों के संगीतकार एस डी बर्मन थे। उस दौरान साहिर को गुरुदत्त की टीम का हिस्सा माना जाता है। बर्मन के साथ साहिर की आखिरी फिल्म ‘प्यासा’ थी। इसके बाद दोनों के बीच कुछ मतभेद हो गए। जिसका कारण बर्मन और साहिर की राहें अलग हो गईं।
लिखे ये गाने
साहिर लुधियानवी की कविताएं और शायरी दत्ता नायक को काफी ज्यादा पसंद थीं। जिस कारण साहिर ने दत्ता नायक के साथ तमाम फिल्मों के लिए गाने लिखे थे। साहिर लुधियानवी ने फिल्म ‘चंद्रकांता’, ‘दास्तान’, ‘मिलाप’, ‘इज्जत’ और ‘दाग’ के लिए भी गाने लिखे थे।
लता मंगेशकर के साथ विवाद
बताया जाता है कि साहिर लुधियानवी ने लता मंगेशकर से ज्यादा फीस की डिमांड की थी। साहिर का कहना था कि भले ही उनको लता से एक रुपए ही ज्यादा दिया जाए, लेकिन उनको लता से ज्यादा फीस दी जाए। जिसके कारण साहिर और लता के बीच मतभेद हो गए थे।
मृत्यु
वहीं 25 अक्तूबर 1980 को 59 साल की उम्र में साहिर लुधियानवी ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। जिसके बाद उनको मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ जुहू में दफनाया गया था।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.