बिहार सरकार ने राज्य के 211 प्रखंडों में नए सरकारी डिग्री काॅलेज खोलने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े. 15 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राज चौधरी ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन कॉलेजों का उद्घाटन भी किया. सरकार के दावा है कि इस पहल से छात्रों को अपने जिले और आसपास ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलेगा. हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति अभी सरकार के दावों से काफी अलग दिखाई दे रही है. कई नए कॉलेजों में न तो स्थायी भवन है, न पर्याप्त शिक्षक और न ही पढ़ाई के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध है.
कई कॉलेज अभी अस्थायी भवन से संचालित
जमीनी पड़ताल से सामने आया है कि राज्य के कई सरकारी डिग्री कॉलेज फिलहाल पहले स्थायी परिसर में नहीं चल रहे हैं. कई जगह कॉलेजों को इंटर कॉलेज, स्कूल या अन्य सरकारी भवनों में अस्थायी रूप से शुरू किया गया है. स्थायी भवनों का निर्माण अभी बाकी है. कई संस्थानों में लाइब्रेरी के लिए कमरे तो बनाए गए हैं, लेकिन वहां किताबें उपलब्ध नहीं है. वहीं फर्नीचर, लैब और दूसरे शैक्षणिक संसाधनों का काम भी कई जगह अधूरा है. सरकार का कहना है कि सभी सुविधाएं चरणबाद तरीके से विकसित की जाएगी
एडमिशन शुरू लेकिन शिक्षकों की भारी कमी
कॉलेज में इतिहास, हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में प्रवेश परीक्षा शुरू हो चुकी है. इसके बावजूद अधिकांश कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी. फिलहाल कई संस्थाओं का संचालन प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए प्राचार्यों, बर्सर और शिक्षकों के भरोसे किया जा रहा है. कई विषय ऐसे हैं, जिनमें छात्र तो एडमिशन ले चुके हैं, लेकिन पढ़ने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं है.
पूर्णिया में लाइब्रेरी है, लेकिन किताबें नहीं
पूर्णिया जिले में केनगर, श्रीनगर, जलालगढ़, रुपौली और बायसी समेत 6 नए सरकारी डिग्री कॉलेज खोले गए हैं. केनगर सरकारी डिग्री कॉलेज में करीब 120 छात्रों ने एडमिशन लिया है. यहां कक्षाएं संचालित करने के लिए कमरे, टेबल और बेंच उपलब्ध है, लेकिन लाइब्रेरी में किताबें नहीं है. कॉलेज में 6 विषयों में पढ़ाई की योजना है, लेकिन फिलहाल केवल दो शिक्षक ही कार्यरत है. एक शिक्षक प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि दूसरे शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर तैनात है. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के बाद सभी विषयों की कक्षाएं शुरू कर दी जाएगी.
मुजफ्फरपुर में इतिहास के छात्र ज्यादा, शिक्षक नहीं
मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड स्थित सरफुद्दीनपुर सरकारी डिग्री कॉलेज में अब तक 21 छात्र ने एडमिशन लिया है. इनमें सबसे ज्यादा 13 छात्रों ने इतिहास विषय चुना है. लेकिन कॉलेज में इतिहास का कोई टीचर मौजूद ही नहीं है. यह कॉलेज फिलहाल एक मध्य विद्यालय परिसर से संचालित हो रहा है, जहां स्कूल के 10 कमरों को डिग्री कॉलेज के लिए उपलब्ध कराया गया है. कॉलेज में अभी केवल प्रभारी प्राचार्य, बर्सर और एक नाइट गार्ड कार्यरत हैं. प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद सभी विषयों की नियमित पढ़ाई शुरू होगी.
उच्च शिक्षा मंत्री ने भी मानीं कमियां
बिहार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने स्वीकार किया है कि कई नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में अभी न तो स्थायी भवन तैयार है और न ही पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति हो सकी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले कॉलेजों की शुरुआत करने का फैसला लिया है, जबकि भवन निर्माण, शिक्षकों की भर्ती और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. मंत्री के अनुसार विभाग लगातार काम कर रहा है और आने वाले समय में इन सभी कॉलेजों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधा मिल सकें.
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.