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कुछ दिन पहले बेंगलुरु के ब्रूकफील्ड स्थित एक डे-केयर सेंटर में कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया। पुलिस को दिए बयान में ढाई साल की एक बच्ची के माता-पिता ने बताया कि डे-केयर जॉइन करने के बाद उनकी बेटी में बाथरूम को लेकर गहरा डर बैठ गया था। पता चला कि उस सेंटर वे लोग बच्चों को बाथरूम में बंद करते थे और
रोने पर टॉयलेट जेट स्प्रे से पानी मारते थे।
‘टॉयलेट एंग्जाइटी’ मनोविज्ञान में एक एक्सेप्टेड टर्म है। हालांकि इसके पीछे कारण हमेशा अब्यूज नहीं होता। अगर बच्चा टॉयलेट जाने में आनाकानी करे तो पेरेंट्स को लगता है कि वो ‘जिद’ कर रहा है। लेकिन कई बार इसके पीछे असली कारण ‘टॉयलेट एंग्जाइटी’ हो सकती है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज बच्चों में टॉयलेट एंग्जाइटी के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- बच्चों में इसके संकेत कैसे पहचानें?
- कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
- इसे दूर करने के लिए पेरेंट्स क्या करें?
एक्सपर्ट: डॉ. बिलाल खान, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक मेडिसिन एंड पीआईसीयू, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम और दिल्ली
सवाल- टॉयलेट एंग्जाइटी क्या है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- टॉयलेट एंग्जाइटी मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक कंडीशन है।
- इसमें व्यक्ति को टॉयलेट इस्तेमाल करने को लेकर जरूरत से ज्यादा घबराहट, डर या स्ट्रेस महसूस होता है।
- इस वजह से कुछ लोग वॉशरूम जाने से बचते हैं।
- लंबे समय तक टॉयलेट रोककर रखते हैं।
- ऐसे लोग बाहर निकलने से भी कतराने लगते हैं।
सवाल- क्या बच्चों में ये होना नॉर्मल है?
जवाब- छोटे बच्चों में टॉयलेट को लेकर थोड़ी झिझक या डर होना असामान्य नहीं है। खासकर 2–5 साल की उम्र में, जब वे टॉयलेट ट्रेनिंग सीख रहे होते हैं या किसी नई जगह के टॉयलेट का इस्तेमाल शुरू करते हैं। यह डर अक्सर अस्थायी होता है और बच्चे के माहौल से सहज होने पर धीरे-धीरे कम हो जाता है।
हालांकि, अगर बच्चा अचानक–
- टॉयलेट जाने से पूरी तरह बचने लगे।
- हर बार टॉयलेट का नाम सुनकर रोने या घबराने लगे।
- पेशाब या मल रोकने लगे।
- यह व्यवहार कई हफ्तों तक बना रहे।
तो इसे सामान्य नहीं माना जाता। इसके पीछे कोई शारीरिक परेशानी, दर्द, डरावना अनुभव या भावनात्मक कारण हो सकता है।
सवाल- टॉयलेट एंग्जाइटी के लक्षण या संकेत क्या हैं?
जवाब- टॉयलेट एंग्जाइटी होने पर बच्चों में ये संकेत दिखाई दे सकते हैं–

सवाल- बच्चों में टॉयलेट एंग्जाइटी क्यों होती है?
जवाब- इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसेकि-
- टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान ज्यादा डांट या दबाव।
- स्कूल/पब्लिक टॉयलेट में गंदगी, स्मेल और प्राइवेसी की कमी।
- फ्लश की तेज आवाज, अंधेरे में या अकेले टॉयलेट जाने का डर।
- स्टूल पास करते समय कब्ज या दर्द का अनुभव।
- नया स्कूल या नया माहौल।
- टॉयलेट को लेकर शर्मिंदगी।
- जरूरत से ज्यादा संकोची स्वभाव।
सवाल- किस उम्र के बच्चों में यह समस्या ज्यादा होती है?
जवाब- यह समस्या किसी भी उम्र के बच्चों में हो सकती है, लेकिन 2-6 साल के बच्चों में ज्यादा होती है।
दरअसल इसी उम्र में टॉयलेट ट्रेनिंग शुरू होती है। बच्चे पहली बार स्कूल या डे-केयर भी जाते हैं। ऐसे में नए माहौल और नई आदतों की वजह से कुछ बच्चों में टॉयलेट को लेकर डर या झिझक हो सकती है।
सवाल- जिन बच्चों को पहले से एंग्जाइटी या स्ट्रेस है, क्या उनमें इसका रिस्क बढ़ जाता है?
जवाब- हां, इसके कई कारण हैं-
- एंग्जाइटी या स्ट्रेस से परेशान बच्चे नई परिस्थितियों, बदलावों और अनजान जगहों को लेकर ज्यादा सेंसिटिव होते हैं।
- वे छोटी-छोटी बातों को भी खतरे या परेशानी की तरह महसूस करते हैं।
- ऐसे में स्कूल का टॉयलेट, पब्लिक टॉयलेट या पहले का कोई बुरा अनुभव उनके मन में डर बिठा सकता है।
- यही डर धीरे-धीरे टॉयलेट एंग्जाइटी का रूप ले सकता है।
सवाल- अगर टॉयलेट एंग्जाइटी का इलाज न हो, तो क्या कॉम्प्लिकेशन्स हो सकते हैं?
जवाब- लंबे समय तक इलाज न मिलने पर कुछ फिजिकल और मेंटल प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। जैसे-
- टॉयलेट को लेकर डर और एंग्जाइटी बढ़ सकती है।
- बच्चा स्कूल या अन्य सार्वजनिक जगहों का टॉयलेट का इस्तेमाल करने से बचने लगता है।
- बच्चे का आत्मविश्वास कम हो सकता है।
- लंबे समय तक कब्ज की समस्या रह सकती है।
- पॉटी करते समय दर्द हो सकता है।
- पेशाब रोकने की वजह से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) हो सकता है।

सवाल- किन समस्याओं की वजह से बच्चा टॉयलेट जाने से डर सकता है?
जवाब- कुछ हेल्थ इश्यूज भी बच्चे में टॉयलेट जाने का डर पैदा कर सकते हैं। ग्राफिक में देखिए-

अगर बच्चा दर्द या जलन की वजह से टॉयलेट जाने से बच रहा है, तो पहले इसका इलाज कराना जरूरी है। कई बार हेल्थ इश्यू ठीक होने के बाद टॉयलेट का डर भी कम हो जाता है।
सवाल- अगर बच्चा स्कूल में टॉयलेट नहीं जा रहा है तो इसके पीछे क्या संभावित कारण हो सकते हैं?
जवाब- इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं-
- स्कूल का टॉयलेट इस्तेमाल करने में असहज महसूस होना।
- क्लास के बीच में टॉयलेट जाने के लिए टीचर से पूछने में झिझक।
- दूसरे बच्चों के सामने टॉयलेट जाने में शर्म महसूस होना।
- स्कूल का टॉयलेट साफ न लगना या वहां प्राइवेसी न मिलना।
- स्कूल के टॉयलेट से जुड़ा कोई बुरा अनुभव होना।
सवाल- ये कैसे समझें कि बच्चे को टॉयलेट एंग्जाइटी है?
जवाब- अगर बच्चा पॉटी रोक रहा है, तो बच्चे में कुछ संकेत दिख सकते हैं, जैसे-
- पैरों को क्रॉस करना या शरीर को अकड़ाकर खड़े होना।
- बार-बार बैठना-उठना या बेचैन दिखना।
- टॉयलेट का नाम सुनते ही घबरा जाना।
- किसी कोने में छिप जाना या टॉयलेट जाने से मना करना।
ध्यान रखें- सिर्फ ये संकेत टॉयलेट एंग्जाइटी की पुष्टि नहीं करते। अगर ऐसे व्यवहार बार-बार दिखें या बच्चा लंबे समय तक पॉटी रोककर रखे, तो पीडियाट्रिशियन से सलाह लेनी चाहिए।
सवाल- ऐसे में माता-पिता को कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
जवाब- माता पिता के कुछ व्यवहार बच्चे की टॉयलेट एंग्जाइटी को बढ़ा सकते हैं। ग्राफिक में पेरेंट्स की सभी गलतियां देखिए-

सवाल- टॉयलेट एंग्जाइटी का इलाज क्या है?
जवाब- इसके इलाज के लिए सबसे पहले यह पता लगाया जाता है कि बच्चा टॉयलेट से क्यों डर रहा है। कारण के अनुसार इलाज किया जाता है। जैसेकि-
बिहेवियर थेरेपी
- इसमें बच्चे को धीरे-धीरे बिना दबाव के टॉयलेट इस्तेमाल करने की आदत डलवाई जाती है।
- डर को कम करने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाए जाते हैं।
काउंसलिंग
- अगर डर, तनाव या कोई बुरा अनुभव इसकी वजह है, तो चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट बच्चे और माता-पिता दोनों की काउंसलिंग करते हैं।
- इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और टॉयलेट को लेकर डर कम होता है।
मूल कारण का इलाज
- अगर कब्ज, पॉटी करते समय दर्द या कोई दूसरी समस्या है, तो पहले उसका इलाज किया जाता है।
- दर्द खत्म होने पर कई बच्चों का डर भी अपने-आप कम हो जाता है।
दवा
- आमतौर पर टॉयलेट एंग्जाइटी के लिए दवा नहीं दी जाती।
- अगर बच्चे में गंभीर एंग्जाइटी या कोई अन्य मेंटल हेल्थ कंडीशन हो तो विशेषज्ञ जरूरत के अनुसार दवा दे सकते हैं।
सवाल- घर पर कौन-सी एक्सरसाइज या रिलैक्सेशन तकनीकें मदद कर सकती हैं?
जवाब- घर पर कुछ आसान तकनीकें बच्चे की टॉयलेट एंग्जाइटी कम करने में मदद कर सकती हैं। जैसे-
डीप ब्रीदिंग
- बच्चे को नाक से गहरी सांस लेकर मुंह से धीरे-धीरे छोड़ना सिखाएं।
- इससे शरीर शांत होता है और एंग्जाइटी कम होती है।
प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन
- बच्चे को हाथ-पैर और कंधों की मांसपेशियों को कुछ सेकेंड कसकर फिर ढीला छोड़ना सिखाएं।
- इससे शरीर का तनाव कम होता है।
रूटीन टॉयलेट सिटिंग
- रोज खाना खाने के 10–15 मिनट बाद 5–10 मिनट बिना दबाव के टॉयलेट पर बैठने की आदत डालें।
- इससे टॉयलेट का डर धीरे-धीरे कम हो सकता है।
पॉजिटिव रीइन्फोर्समेंट
- बच्चा कोशिश करे या टॉयलेट इस्तेमाल करे, तो उसकी तारीफ करें।
- इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।
खेल और कहानी का सहारा
- छोटे बच्चों के लिए टॉयलेट ट्रेनिंग को खेल, कहानी या चित्रों के जरिए आसान बनाया जा सकता है।
- इससे टॉयलेट को लेकर बना डर कम होता है।
सवाल- डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
जवाब- अगर ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए-
- टॉयलेट का डर कई हफ्तों तक बना रहे।
- बच्चा बार-बार पॉटी या पेशाब रोककर रखे।
- पॉटी करते समय दर्द, ब्लीडिंग या कब्ज की शिकायत हो।
- डर की वजह से स्कूल जाने या बाहर निकलने से बचने लगे।
- रोजमर्रा की पढ़ाई, खेलकूद या व्यवहार प्रभावित होने लगे।
- घर पर किए गए उपायों से भी कोई सुधार न हो।
सवाल- क्या टॉयलेट एंग्जाइटी अपने आप भी ठीक हो सकती है?
जवाब- हां, अगर समस्या हल्की है और किसी नए माहौल या टॉयलेट ट्रेनिंग की वजह से है, तो समय, सपोर्ट और सही माहौल मिलने पर यह अपने-आप ठीक हो सकती है।
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