Bashir Badra Death : मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है. अपनी खूबसूरत शायरी, मोहब्बत से लबरेज गजलों और आम जिंदगी के एहसासों को अल्फाज देने वाले बशीर बद्र लंबे समय से डिमेंशिया नाम की बीमारी से जूझ रहे थे. यह वही बीमारी है, जो धीरे-धीरे इंसान की याददाश्त छीन लेती है. बताया जा रहा है कि जिंदगी के आखिरी दिनों में वह अपने करीबी लोगों तक को पहचान नहीं पा रहे थे. जिन शब्दों से उन्होंने लाखों दिलों को छुआ, आखिर में वही शख्स अपनी यादों की दुनिया में अकेला पड़ता चला गया.
ऐसे में मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन के बाद अब लोगों के बीच डिमेंशिया को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं और इसके बारे में काफी कुछ सर्च भी किया जा रहा है. तो आइए जानते हैं कि आखिर डिमेंशिया क्या है, यह कितनी खतरनाक बीमारी है और इसमें कैसे इंसान मौत से पहले ही सबकुछ भूल जाता है.
क्या होती है डिमेंशिया बीमारी?
डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई मानसिक समस्याओं का रूप है. इसमें इंसान की सोचने, समझने, याद रखने और फैसले लेने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. शुरुआत में मरीज छोटी-छोटी बातें भूलता है, लेकिन समय बीतने के साथ हालत इतनी बिगड़ सकती है कि वह अपने परिवार, दोस्तों और रोजमर्रा की चीजों को भी पहचानना बंद कर देता है. यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखने को मिलती है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ होने वाली सामान्य भूलने की आदत और डिमेंशिया में बड़ा फर्क होता है. आम भूलने की समस्या में इंसान थोड़ी देर बाद चीजें याद कर लेता है, जबकि डिमेंशिया में यादें लगातार खत्म होती जाती हैं.
डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
इस बीमारी की शुरुआत बहुत धीरे-धीरे होती है. कई बार परिवार वाले भी इसे सामान्य बुढ़ापे की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. डिमेंशिया के कुछ सामान्य लक्षण हैं. जैसे बार-बार बातें भूल जाना, लोगों के नाम या चेहरे याद न रहना, एक ही सवाल कई बार पूछना, बातचीत में सही शब्द न ढूंढ पाना, चीजें रखकर भूल जाना, रास्ते भूल जाना, फैसले लेने में परेशानी होना, स्वभाव में अचानक बदलाव आना, गुस्सा, चिड़चिड़ापन या उदासी बढ़ जाना और बीमारी बढ़ने पर मरीज खाना खाना, कपड़े पहनना और रोजमर्रा के काम करना भी भूल सकता है.
क्यों हो जाती है यह बीमारी?
डिमेंशिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे आम वजह अल्जाइमर बीमारी मानी जाती है. इसके अलावा दिमाग की नसों में दिक्कत, सिर में चोट, पार्किंसन, स्ट्रोक, विटामिन B12 की कमी, थायराइड की समस्या और लंबे समय तक शराब या नशे का सेवन भी इसकी वजह बन सकता है. कुछ मामलों में यह बीमारी तेजी से बढ़ती है, जबकि कई लोगों में सालों तक धीरे-धीरे असर दिखता है.
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इसमें कैसे इंसान मौत से पहले ही सबकुछ भूल जाता है?
इस बीमारी में इंसान धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगता है. वह पहले छोटी-छोटी बातें भूलता है, फिर लोगों के नाम, चेहरे और जरूरी बातें याद नहीं रहतीं, बीमारी बढ़ने पर वह अपने परिवार और करीबी लोगों को भी पहचान नहीं पाता है. कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि इंसान को अपनी ही जिंदगी की बातें तक याद नहीं रहतीं, इसलिए कहा जाता है कि डिमेंशिया में व्यक्ति मौत से पहले ही सबकुछ भूलने लगता है.
क्या है डिमेंशिया का इलाज
डॉक्टरों के मुताबिक डिमेंशिया को पूरी तरह खत्म करने वाली कोई दवा फिलहाल मौजूद नहीं है, लेकिन सही इलाज और देखभाल से इसकी रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है. मरीज को समय पर दवाएं देना, मानसिक रूप से सक्रिय रखना, परिवार का साथ और शांत माहौल देना बहुत जरूरी माना जाता है. कई मामलों में अगर बीमारी किसी दूसरी वजह से हुई हो, जैसे विटामिन की कमी या थायराइड की समस्या, तो इलाज से सुधार भी हो सकता है.
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