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‘बालिका वधू’ बनकर घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली अविका गौर एक बार फिर छोटे पर्दे पर वापसी कर रही हैं। वह रोहित शेट्टी के स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ में अपने डर का सामना करती नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अविका ने अपनी जिंदगी के सबसे बड़े खौफ, टीनेज के दौरान आए मानसिक बदलाव और खुद को संभालने की अपनी अनोखी तकनीक पर खुलकर बात की।
अविका ने स्वीकार किया कि एक दौर ऐसा था जब वह खुद को नापसंद करने लगी थीं और आईना देखने से भी कतराती थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी ‘रियल इमेज’ को लेकर भी दिलचस्प खुलासे किए।

अविका गौर 7 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था।
सवाल: आप एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आने वाली हैं, क्या अब आप पूरी तरह ‘फियरलेस’ हो गई हैं? जवाब: सच कहूं तो मुझे इस ‘फियरलेस’ टैग से ही डर लगता है। मुझे बहुत सारी चीजों से डर लगता है। यह एक ऐसा शो है जहां आपको हाइट, पानी, कीड़े-मकोड़े हर तरह के डर का सामना करना पड़ता है। मैं बस यह उम्मीद कर रही हूं कि इस बार इन सबका सामना अच्छे से कर पाऊं।
सवाल: आप पहले भी इस शो का हिस्सा रही हैं, क्या उस अनुभव से पुराने डर खत्म हुए? जवाब: कुछ भी खत्म नहीं हुआ, बल्कि मेरे डर और बढ़ गए हैं। सीजन-9 में जब मैं गई थी, तब मुझे लगता था कि मैं किसी चीज से नहीं डरती। वहां जाकर पता चला कि मुझे हाइट और पानी से बहुत डर लगता है। मैं बहुत ज्यादा ओवरकॉन्फिडेंस में थी और शायद इसीलिए पहली ही एलिमिनेशन में बाहर हो गई थी।
सवाल: इस बार आपकी क्या तैयारी है? जवाब: इस बार मैं खुद को ज्यादा मैच्योर महसूस कर रही हूं। मेरी स्ट्रैटेजी बस इतनी है कि मैं ईमानदार रहूंगी। मैं यह सोचकर नहीं जाऊंगी कि सब कुछ आसान है। अगर मुझे डर लगेगा, तो मैं खुलकर बोलूंगी कि मुझसे नहीं हो रहा। मैं अपने डर का सामना एक ओपन माइंडसेट के साथ करना चाहती हूं।

सवाल: आपने महज 7 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था, इतनी छोटी उम्र में कामयाबी के साथ क्या कोई खौफ भी आया? जवाब: शुरुआत से मेरे मन में बस एक ही डर था, मेरी जिंदगी में जो हो रहा है, वह सही है या गलत? 10 साल की उम्र में ‘बालिका वधू’ के बाद सब कुछ बदल गया। मैं हमेशा इस डर में रहती थी कि क्या मैं सच में एक्टिंग करना चाहती हूं या यह सब बस हो रहा है। सालों बाद मुझे समझ आया कि यही मेरा पैशन है।
सवाल: आपने अपनी टीनेज के मुश्किल दौर का जिक्र किया था, वह क्या था? जवाब: हां, एक वक्त ऐसा था जब मैं खुद को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी। मैं उस फेज से गुजर रही थी जहां मुझे आईने में खुद को देखना भी अच्छा नहीं लगता था। वह ‘सेल्फ-हेट’ का दौर था। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मुझे समझ आया कि वह सिर्फ एक फेज था। मैंने खुद का ध्यान रखना शुरू किया और धीरे-धीरे मैं खुद को पसंद आने लगी।
सवाल: आप खुद को मेंटली और इमोशनली कैसे बैलेंस रखती हैं? जवाब: मैंने एक बहुत अच्छी तकनीक अपनाई है। मैं दिन में 5 मिनट का एक टाइमर लगाती हूं। उस 5 मिनट में मुझे जिस चीज के बारे में शिकायत करनी होती है, रोना होता है या दुखी होना होता है, मैं कर लेती हूं। जैसे ही टाइमर बजता है, दुख वहीं खत्म। मैं फिर से नॉर्मल होकर काम पर लग जाती हूं।

सवाल: क्या इतनी कम उम्र से पब्लिक आई में रहना किसी तरह का नुकसान भी पहुंचाता है? जवाब: बेशक, लोग आपको शुरुआत से देख रहे हैं तो आपकी हर चीज की स्क्रूटनी होती है। लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। खासकर शो ‘पति पत्नी और पंगा’ के बाद, जहां मेरी लाइफ की पर्सनल चीजें भी सामने आ गईं। मुझे लगा कि अब जब सबको सब पता ही है, तो फिल्टर लगाने का क्या फायदा? अब मैं इंटरव्यू में भी वैसी ही रहती हूं जैसी असल जिंदगी में हूं।
सवाल: इस बार जब आपने दोबारा शो पर जाने का फैसला लिया, तो घर वालों और आपके पार्टनर का क्या रिएक्शन था? जवाब: मेरे पापा को लगा कि मैं पागल हो गई हूं। वो सोच रहे थे कि पिछली बार जब चोट लगी थी, जिसके स्कार्स आज भी मेरे पैर पर हैं, तो मैं वापस वहां क्यों जाना चाहती हूं? लेकिन मेरे पार्टनर (मिलिंद) को मुझ पर मुझसे ज्यादा भरोसा था। उन्होंने मुझसे कहा कि तू कितना भी ड्रामा कर ले कि तुझे नहीं जाना, लेकिन तू जाएगी जरूर। और बिल्कुल वैसा ही हुआ।
सवाल: इस सीजन में पुराने और नए खिलाड़ियों का कॉम्बिनेशन है, आप किसे लेकर ज्यादा एक्साइटेड हैं? जवाब: मैं पुराने लोगों को तो जानती हूं, जैसे विशाल, रुबीना, करण वाही ये सब बहुत अच्छा खेलते हैं। लेकिन मैं उन लोगों को जानने के लिए ज्यादा एक्साइटेड हूं जिन्हें मैं नहीं जानती, जैसे ओरी, हर्ष या रूहानिका। नए दोस्त बनाना और उनका माइंडसेट समझना मेरे लिए दिलचस्प होगा।
सवाल: अक्सर लड़कियों को शारीरिक रूप से कमजोर माना जाता है, आप इस परसेप्शन को कैसे तोड़ेंगी? जवाब: पिछले सीजन्स में तेजू (तेजस्वी प्रकाश), निया शर्मा और जन्नत जुबैर ने साबित किया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। उन्हें देखकर मुझे बहुत इंस्पिरेशन मिलता है। मैं इस बार जीत-हार के बारे में नहीं सोच रही, बस इतना चाहती हूं कि स्टंट के दौरान कॉकरोच मेरे सामने न आएं।
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