Asthma Plant: घर के आसपास आसानी से नजर आने वाला ये पौधा सिर्फ जंगली घास नहीं है। सांस, खांसी और पाचन से जुड़ी परेशानियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। जानिए क्या है इसकी खासियत।
हमारे आसपास कई ऐसे पौधे होते हैं, जिन्हें लोग सिर्फ घास या जंगली समझकर इग्नोर कर देते हैं। इन्हीं में से एक है यूफोर्बिया हिरटा, जिसे कुछ जगहों पर बड़ी दूधिका या बड़ी दूधी जैसे नामों से भी जाना जाता है। पारंपरिक इलाज में इसका इस्तेमाल खांसी, सांस लेने में परेशानी, ब्रोंकाइटिस और पेट से जुड़ी दिक्कतों में किया जाता रहा है। यही वजह है कि इसे कई जगहों पर अस्थमा प्लांट भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस पौधे की पहचान, इसमें पाए जाने वाले खास तत्व और इसके फायदों के बारे में।
क्या है अस्थमा प्लांट?
- अस्थमा प्लांट का साइंटिफिक नाम यूफोर्बिया हिरटा है। यह आमतौर पर छोटा और जमीन के पास फैलने वाला पौधा है। इसकी डंडी और पत्तियों पर बारीक बाल दिखाई दे सकते हैं। पत्तियां छोटी, अंडाकार और हल्के हरे रंग की होती हैं।
- यह पौधा गर्म मौसम वाले इलाकों में आसानी से उग जाता है। इसकी सबसे खास पहचान इसकी डंडी है। इसे तोड़ने पर सफेद रंग का दूध जैसा चिपचिपा रस निकलता है।
- इसमें फ्लेवोनॉयड, टैनिन, फेनोलिक यौगिक और टेरपेनॉयड जैसे तत्व होते हैं।
अस्थमा के लिए क्यों?
इस पौधे का इस्तेमाल पारंपरिक इलाज में अस्थमा और सांस से जुड़ी कुछ परेशानियों के लिए किया जाता रहा है। इसके कुछ गुण सांस से जुड़ी परेशानी में राहत देने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना बहुत जरूरी है। यह पौधा अस्थमा की पक्की दवा नहीं है, इसलिए इसे इलाज का विकल्प मानना सही नहीं है।
खांसी और सीने में जकड़न
पारंपरिक तरीके से इस पौधे का इस्तेमाल खांसी और सांस की परेशानी के साथ सीने में कफ जमा होने या भारीपन महसूस होने पर भी किया जाता है। इसकी पत्तियों से बनी चाय सर्दी-खांसी में राहत दिला सकती है।
पाचन के लिए भी
अस्थमा प्लांट का इस्तेमाल सिर्फ सांस से जुड़ी परेशानियों तक सीमित नहीं है। पारंपरिक चिकित्सा में इसे पेट दर्द, दस्त और पाचन से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
क्या इसकी चाय पी सकते हैं?
सोशल मीडिया या घरेलू नुस्खों में इस पौधे से चाय या काढ़ा बनाने की बातें मिल सकती हैं। लेकिन सिर्फ इंटरनेट पर देखकर इसे बनाकर पीना सही नहीं है। पौधे की सही पहचान, मात्रा और इस्तेमाल का तरीका बहुत जरूरी है।
चाय कैसे बनाएं?
- अस्थमा प्लांट की चाय बनाने के लिए सबसे पहले इसकी कुछ साफ और अच्छी पत्तियां लें। पत्तियों को पानी से अच्छी तरह धो लें। अब एक कप पानी को पैन में गर्म करें और उसमें पत्तियां डाल दें। इसे करीब 5 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें।
- इसके बाद गैस बंद करके चाय को छान लें और हल्का गुनगुना होने पर पी लें। इसमें स्वाद के लिए थोड़ा शहद या नींबू भी मिला सकते हैं। इसे कितनी मात्रा में और कब-कब पीना चाहिए, पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह ले लें।
नोट: अगर किसी को बार-बार सांस फूलना, सीने में जकड़न या सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आती है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है। खासकर अगर पहले से अस्थमा की दवा चल रही है, तो उसे छोड़कर किसी जड़ी-बूटी का इस्तेमाल शुरू नहीं करना चाहिए।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.