अभिनेता राहुल बुच्चर ने कहा कि भगवान राम का किरदार निभाना उनके लिए सिर्फ एक भूमिका नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव जैसा होता है. जब वह मंच पर पहली बार राम के रूप में प्रवेश करते हैं. उस समय उनके मन में किसी तरह की घबराहट या विचार नहीं होते. उनका पूरा ध्यान केवल प्रभु की आराधना पर होता है
मंच पर आते ही अभिनय नहीं, भक्ति का भाव
अभिनेता Rahul Bucchar ने बताया कि भगवान राम का किरदार निभाना उनके लिए सिर्फ एक भूमिका नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव जैसा होता है.उन्होंने कहा कि जब वह मंच पर पहली बार राम के रूप में प्रवेश करते हैं, उस समय उनके मन में किसी तरह की घबराहट या विचार नहीं होते. उनका पूरा ध्यान केवल प्रभु की आराधना पर होता है.उनके अनुसार, उस पल में वह यही प्रार्थना करते हैं कि उन्हें यह जिम्मेदारी निभाने की शक्ति मिले और दर्शकों तक राम के आदर्शों का संदेश सही तरीके से पहुंचे.
जिम्मेदारी और आस्था दोनों का संगम
Rahul Bucchar का मानना है कि भगवान राम का किरदार निभाना किसी भी कलाकार के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है. यह केवल मंच पर अभिनय करना नहीं है, बल्कि उस चरित्र की मर्यादा, शालीनता और आदर्शों को जीना भी होता है. इस भूमिका को निभाते समय उनकी भक्ति और समर्पण खुद-ब-खुद दर्शकों के सामने दिखाई देता है. उनके लिए यह एक तरह से प्रभु की सेवा जैसा है.
दर्शकों तक राम के आदर्श पहुंचाने की कोशिश
अभिनेता का कहना है कि मंच के माध्यम से भगवान राम के आदर्शों को लोगों तक पहुंचाना ही उनका सबसे बड़ा उद्देश्य है. जब दर्शक उस किरदार से जुड़ते हैं और भावुक हो जाते हैं, तब उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत सफल हो गई.राहुल के अनुसार, भगवान राम का चरित्र हमें जीवन में सत्य, मर्यादा और कर्तव्य का पालन करना सिखाता है और यही संदेश वह अपनी प्रस्तुति के जरिए लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं.
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