डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें उसने मौजूदा संघर्ष के दौरान अमेरिका और इज़राइल के हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवज़े की मांग की थी। इसके बजाय, ट्रंप ने मांग की कि तेहरान को अमेरिका को भुगतान करना चाहिए और अपने हमलों से जुड़ी मौतों और घायलों के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। खबरों के मुताबिक, ईरान ने वॉशिंगटन से युद्ध से हुए नुकसान के लिए 300 अरब डॉलर के मुआवज़े की मांग की है, साथ ही फ्रीज़ की गई 100 अरब डॉलर तक की ईरानी संपत्ति को जारी करने की भी मांग की है। तेहरान ने इन मांगों को रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से फिर से खोलने के किसी भी समझौते से जोड़ा है।
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ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने ईरान की मुआवज़े की मांग को एक “दिलचस्प विचार” बताया और कहा कि वह भविष्य की बातचीत में जवाबी मांग रखेंगे। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधि उस नुकसान के लिए मुआवज़ा मांग रहे थे जो उनके शब्दों में “पिछले पांच महीने के सैन्य संघर्ष” के दौरान हुआ था। उनका दावा था कि यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब ईरान ने अपने परमाणु हथियार छोड़ने से इनकार कर दिया। ईरान के खिलाफ़ अमेरिका-इज़राइल युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
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ट्रंप ने कहा कि ईरान को उन लोगों के परिवारों को भी मुआवज़ा देना चाहिए जो तेहरान से जुड़े हमलों और संघर्षों में मारे गए या घायल हुए। उन्होंने खास तौर पर 2000 में USS कोल पर हुए बम धमाके और अन्य घटनाओं का ज़िक्र किया, साथ ही ईरान के दिवंगत सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी का भी ज़िक्र किया, जो 2020 में बगदाद में ट्रंप के आदेश पर हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे। ट्रंप ने कहा मैं भी ईरान से उन सभी लोगों के लिए मुआवज़े की मांग कर रहा हूं जिन्हें उन्होंने मारा है और गंभीर रूप से घायल किया है।
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