मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसी तरह के अन्य मामलों में भी कई लोगों ने अपने रुपये गंवाने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि निवेशकों को बड़े रिटर्न और वित्तीय स्वतंत्रता का वादा किया गया, लेकिन अधिकांश प्रतिभागियों को नुकसान उठाना पड़ा।
कैसे काम करता है कथित नेटवर्क मॉडल
जांच एजेंसियों और उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर सामने आए मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है। शुरुआत आमतौर पर सोशल मीडिया या किसी ग्रुप से होती है, जिसमें ई-कॉमर्स, वेलनेस प्रोडक्ट्स, पैसिव इनकम और इंटरनेशनल बिज़नेस जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
इसके बाद संभावित सदस्यों को ह्वाट्सएप या टेलीग्राम से जोड़ा जाता है, जहाँ पहले से जुड़े लोग अपनी कथित सफलता की कहानियां साझा करते हैं। इसके बाद जूम कॉल, होटल मीटिंग और मोटिवेशनल प्रेजेंटेशन के जरिए मॉडल को विश्वसनीय दिखाने की कोशिश की जाती है।
आरोप है कि ट्रेनिंग के नाम पर नए लोगों को नेटवर्क बढ़ाने और अधिक सदस्यों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। कई मामलों में बड़ी अग्रिम राशि जमा कराने और विदेशी वेबसाइटों के माध्यम से भुगतान कराने के आरोप भी सामने आए हैं।
हैदराबाद में बहु-राज्य कार्रवाई
हैदराबाद पुलिस ने तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में कथित तौर पर QNet/Vihaan से जुड़े नेटवर्क पर एक साथ छापेमारी की थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में कई लोगों को हिरासत में लिया गया. जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ आरोपी संगठित ढंग से लोगों को जोड़ने और शिकायत दर्ज कराने से रोकने का प्रयास कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से चल रहे MLM संबंधित मामलों में कुछ निदेशकों को दोषी ठहराया गया। इसे ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
क्या कहता है कानून
भारत में Prize Chits and Money Circulation Schemes (Banning) Act, 1978 के तहत ऐसी योजनाएं प्रतिबंधित हैं, जहां आय का मुख्य स्रोत भर्ती आधारित नेटवर्क हो. इसके अलावा, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने वैध डायरेक्ट सेलिंग और अवैध पिरामिड स्कीम के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए कई कंपनियों को नोटिस भी जारी किए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी मॉडल में बड़ी अग्रिम राशि जमा करानी पड़े, विदेशी मुद्रा में भुगतान कराया जाए, आय भर्ती पर आधारित हो, उत्पाद वितरण व्यवस्था स्पष्ट न हो, तो निवेशकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
पीड़ित क्या करें
साइबर विशेषज्ञों और उपभोक्ता अधिकार संगठनों ने पीड़ितों को सभी चैट, भुगतान रसीदें और प्रचार सामग्री सुरक्षित रखने की सलाह दी है। पीड़ित cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं या स्थानीय साइबर थाने से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा उपभोक्ता आयोग और संबंधित नियामक संस्थाओं में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
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