AI voice scams के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसमें AI की मदद से परिवार की सदस्यों की हूबहू आवाज निकाल पैसों की मांग की जाती है और लोग इन कॉल्स को असली मानकर पैसे भेज दी देते हैं। इससे सुरक्षित रहने के लिए जोहो के चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने वर्बल पासवर्ड बनाने की अपील की है।
स्कैम में फंसते-फंसते बचा यूजर, X पर सुनाई अपबीती
@Abomination81 हैंडल वाले एक एक्स यूजर ने X पर अपना अनुभव शेयर किया, उन्होंने बताया कि उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति का फोन आया, जिसकी आवाज बिल्कुल उनकी पत्नी जैसा लग रहा थी। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर दावा किया कि वह अपना बटुआ भूल गई है और गैस का पेमेंट करने के लिए उसे क्रेडिट कार्ड की जरूरत है। अच्छी बात यह थी कि उस वक्त मेरी पत्नी मेरे साथ ही थी, इसलिए में बच गया।
चलिए डिटेल में बताते हैं क्या है पूरा मामला
एक्स पर इस घटना के बारे में बताते हुए यूजर ने कहा कि “अभी 20 मिनट पहले मेरे साथ अब तक का सबसे डरावना स्कैम हुआ। मुझे मेरी पत्नी का फोन आया जिसमें उसने कहा कि वह अपना वॉलेट भूल गई है और उसे गैस के पैसे देने के लिए क्रेडिट कार्ड चाहिए। लेकिन मेरी पत्नी तो मेरे साथ घर पर ही थी और वह टेस्ला कार चलाती है। आवाज बिल्कुल वैसी ही थी, बस थोड़ी… अजीब, बोलने का लहजा भी थोड़ा अलग था, लेकिन 100% उसकी आवाज जैसी ही लग रही थी। अगर वह मेरे साथ न होती और बात गैस की न होती, तो मैं इस झांसे में आ जाता।
मैंने थोड़ी देर तक बात जारी रखी ताकि और जानकारी मिल सके, मैं बहुत कन्फ्यूज था। पक्का यह कोई वॉयस डीपफेक रहा होगा। जवाब AI के हिसाब से बहुत तेजी से आ रहे थे, मुझे लगता है कि यह कोई वॉयस फिल्टर था। काश मैंने इसे रिकॉर्ड करने के बारे में सोचा होता। भविष्य बहुत बुरा होने वाला है। अपने अपनों को सावधान करें, अपने बच्चों के साथ वर्बल पासवर्ड तय करें। मैं थोड़ा हैरान रह गया।”
यूजर ने कहा कि उन्होंने यह समझने के लिए बातचीत जारी रखी कि क्या हो रहा है, लेकिन उन्हें शक हुआ कि कॉलर किसी तरह की वॉयस डीपफेक या वॉयस-फिल्टरिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा था।
इसके बाद उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा “मजाक से हटकर, आपको इसे अपने चाहने वालों के साथ शेयर करना चाहिए। खासकर परिवार के बुजुर्गों और बच्चों के साथ। यह बताना मुश्किल है कि यह कितना बढ़िया था, लेकिन मैं वादा करता हूँ कि यह ज्यादातर लोगों को बेवकूफ बना देगा। इसे जरूर शेयर करें। मैं टेक्नोलॉजी की दुनिया से जुड़ा हूँ और मुझे भी इसके बारे में पता नहीं था, मुझे शक है कि दूसरों को भी पता होगा।” उन्होंने आगे कहा “मैंने और मेरी पत्नी ने इसे दोबारा होने से रोकने के लिए एक मौखिक पासवर्ड तय किया है। कोई भी स्कैमर “पार्सनिप्स” (parsnips) का अंदाजा नहीं लगा पाएगा, यह सिर्फ हम दोनों को ही पता है।”
श्रीधर वेम्बू ने ‘वर्बल पासवर्ड’ का सुझाव दिया
जोहो के चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने इस पोस्ट को रीशेयर किया और चेतावनी दी कि AI से बनी आवाजों की वजह से लोगों के लिए असली कॉल और स्कैम कॉल के बीच फर्क करना मुश्किल हो सकता है। वेम्बू ने सुझाव दिया कि परिवार और करीबी दोस्त एक प्राइवेट ‘वर्बल पासवर्ड’ (बोलकर बताया जाने वाला पासवर्ड) तय कर लें, जिसका इस्तेमाल कॉलर की पहचान वेरिफाई करने के लिए किया जा सके। “करीबी दोस्तों और परिवार के लिए ‘वर्बल पासवर्ड’ बनाना एक अच्छा विचार है, ताकि हम ऊपर बताए गए डीप फेक कॉल जैसे बहुत असली लगने वाले कॉल के झांसे में न आएं। अफसोस की बात है कि AI इतना एडवांस हो गया है कि अब हम आसानी से असली और नकली के बीच फर्क नहीं कर सकते।”
परिवार के सदस्य पहले से कोई ऐसा शब्द या वाक्य तय कर सकते हैं जो बाहर वाले के लिए अनुमान लगाना मुश्किल हो। जब परिवार के सदस्य के पास अचानक किसी व्यक्ति का फोन आए और वे पैसे, कार्ड की जानकारी या कोई और जरूरी जानकारी मांगें, तो पहले से तय किया गया कोई वर्बल पासवर्ड पहचान की अतिरिक्त जांच के तौर पर काम आ सकता है। अगर कॉलर तय किया गया वाक्यांश नहीं बता पाता है, तो फोन उठाने वाला व्यक्ति बातचीत खत्म कर सकता है और जाने-पहचाने फोन नंबर का इस्तेमाल करके सीधे उस परिवार के सदस्य से संपर्क कर सकता है।
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