किन नौकरियों में सबसे ज्यादा छंटनी का डर?
सर्वे में सेल्स एंड मार्केटिंग से जुड़े कर्मचारियों में सबसे ज्यादा 68% लोगों ने अगले 3 से 6 महीनों में छंटनी या बड़े स्तर पर हेडकाउंट कम होने की आशंका जताई। इसके ठीक पीछे AI और मशीन लर्निंग का क्षेत्र रहा, जहां 66% कर्मचारियों को नौकरी में कटौती का डर है। वहीं प्रोडक्ट और डिजाइन से जुड़े 65% कर्मचारियों को भी ऐसी आशंका है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि किसी कंपनी में AI से जुड़ा काम करना अब नौकरी की पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा रहा है।
AI और ML सेक्टर में नौकरियों की डिमांड पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। कंपनियां AI मॉडल, ऑटोमेशन, डेटा प्रोसेसिंग और AI आधारित प्रोडक्ट्स पर भारी निवेश कर रही हैं। इसके बावजूद इस सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को लगता है कि कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करवाने के लिए AI और ऑटोमेशन का इस्तेमाल कर सकती हैं। ऐसे में केवल AI से जुड़ी नौकरी होना ही पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता।
इंजीनियरों को सबसे कम डर क्यों?
सर्वे का सबसे दिलचस्प हिस्सा इंजीनियरिंग से जुड़ा है। आमतौर पर माना जाता है कि AI सबसे पहले सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे कामों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन सर्वे में तस्वीर कुछ अलग दिखाई दी। सिर्फ 24% इंजीनियरों ने कहा कि उनकी टीम में कर्मचारियों की संख्या घटने की संभावना “बहुत ज्यादा” है। यह सर्वे में शामिल सभी प्रमुख कार्यक्षेत्रों में सबसे कम आंकड़ा है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंजीनियर पूरी तरह सुरक्षित हैं। इंजीनियरों में कुल जोखिम वाली भावना करीब 58% रही, लेकिन दूसरे कई विभागों की तुलना में उनका डर कम दिखाई दिया। डेटा और एनालिटिक्स टीम में भी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। इस क्षेत्र में जोखिम वाली भावना करीब 51% रही और लगभग 10 में से 4 कर्मचारियों ने कहा कि छंटनी की संभावना कम है, यानी जिन क्षेत्रों को AI से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला माना जाता है, वहां काम करने वाले कुछ कर्मचारी फिलहाल खुद को अपेक्षाकृत सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
किन कंपनियों में सबसे ज्यादा डर?
सर्वे में कंपनी के आधार पर भी काफी बड़ा अंतर देखने को मिला। सेल्सफोर्स (Salesforce) में 81% और ओरेकल (Oracle) में 80% कर्मचारियों ने नौकरी में कटौती की आशंका जताई। इसके बाद Uber में 77% और PayPal में 75% कर्मचारियों ने भी ऐसा डर व्यक्त किया। दूसरी ओर भारत की SaaS कंपनियों में तस्वीर कुछ अलग रही। Zoho में सिर्फ 9% कर्मचारियों ने छंटनी को लेकर चिंता जताई, जबकि फ्रेशवर्क (Freshworks) में यह आंकड़ा 44% रहा।
इससे यह संकेत मिलता है कि नौकरी की सुरक्षा केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कोई व्यक्ति AI, इंजीनियरिंग या डेटा जैसे किस विभाग में काम करता है। कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल, लागत कम करने की रणनीति और भविष्य की तकनीकी योजनाएं भी कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
छंटनी से पहले कौन से संकेत दिखाई देते हैं?
कर्मचारियों का डर सिर्फ तब पैदा नहीं होता, जब कंपनी आधिकारिक रूप से छंटनी का ऐलान कर देती है। सर्वे के मुताबिक, कर्मचारियों को कई छोटे संकेत पहले ही दिखाई देने लगते हैं। छंटनी की आशंका रखने वाले कर्मचारियों में 27% ने हायरिंग फ्रीज को सबसे बड़ा संकेत माना, यानी कंपनी नई भर्तियां रोक देती है। वहीं, 24% कर्मचारियों ने बजट या हेडकाउंट लक्ष्य में कटौती को महत्वपूर्ण संकेत बताया। इसके मुकाबले सिर्फ 9% लोगों ने औपचारिक छंटनी की घोषणा को प्रमुख संकेत माना।
इसका मतलब है कि कंपनियों में लागत घटाने की प्रक्रिया अक्सर आधिकारिक छंटनी से काफी पहले शुरू हो सकती है। नई भर्तियां बंद होना, टीम का बजट कम होना, नए प्रोजेक्ट्स पर रोक लगना या कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बदलना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन पर कर्मचारियों की नजर रहती है।
AI के दौर में नौकरी बचाने का क्या तरीका?
इस सर्वे का सबसे बड़ा संदेश यही है कि आज सिर्फ एक तकनीकी क्षेत्र में काम करना नौकरी की गारंटी नहीं है। AI और ML प्रोफेशनल्स भी बदलाव से अछूते नहीं हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी मौजूदा स्किल के साथ नई तकनीकों को भी सीखते रहें। खासकर AI का इस्तेमाल अपने मौजूदा काम को बेहतर और तेज करने के लिए कैसे किया जाए, यह समझना महत्वपूर्ण हो सकता है।
सर्वे में शामिल कुछ प्रोफेशनल्स ने भी इसी तरह की चिंता जताई है। एक प्रोफेशनल ने कहा कि मशीन लर्निंग क्षेत्र में काम करने वालों के लिए मौजूदा स्किल को मजबूत करते हुए AI बैकएंड पाइपलाइन जैसी क्षमताओं को जोड़ना जरूरी हो सकता है। हालांकि, किसी एक सर्वे के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि AI या इंजीनियरिंग की नौकरियां निश्चित रूप से सुरक्षित या असुरक्षित हैं। सर्वे मुख्य रूप से कर्मचारियों की धारणा और नौकरी की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता को दिखाता है।
AI का दौर नौकरी खत्म करने से ज्यादा नौकरी के स्वरूप को बदलने वाला साबित हो सकता है। आने वाले समय में उन प्रोफेशनल्स की मांग मजबूत रह सकती है, जो अपनी मौजूदा विशेषज्ञता के साथ AI और ऑटोमेशन को समझते हैं और बदलते कामकाजी माहौल के अनुसार खुद को लगातार अपडेट करते रहते हैं।
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