हवा में 300 फीट नीचे गिर गया था प्लेन
इस फ्लाइट में कुल 145 लोग सवार थे। ओडिशा के पास अचानक विमान को टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा, जिससे प्लेन अचानक 300 फीट नीचे आ गिरा। दिल्ली पहुंचने के बाद 13 यात्रियों और 4 क्रू मेंबर्स को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। एयरलाइन का कहना है कि वे नियमों के तहत क्रू मेंबर्स का रेगुलर ड्रग टेस्ट करते हैं और जांच अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Air India विमान में टर्बुलेंस से 17 लोग हुए घायल, DGCA ने शुरू की जांच
DGCA कर रहा है हर एंगल से जांच
विमानन नियामक DGCA इस पूरी घटना की हर पहलू से जांच कर रहा है। जांच में यह देखा जा रहा है कि टर्बुलेंस को सही तरीके से संभाला गया या नहीं, झटकों से कोई तकनीकी खराबी (जैसे हाइड्रोलिक फेलियर) तो नहीं हुई, और क्या विमान को दिल्ली लाने के बजाय वाराणसी या लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग करानी चाहिए थी।
पायलट को ड्यूटी से हटाया गया
प्रोटोकॉल के तहत जांच पूरी होने तक फ्लाइट क्रू को उड़ानों से हटा दिया गया है। DGCA के नियमों के मुताबिक, अगर कोई पायलट पहली बार डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे रिहैबिलिटेशन के लिए भेजा जाता है और रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही वापस ड्यूटी मिलती है। दूसरी बार पॉजिटिव आने पर लाइसेंस 3 साल के लिए सस्पेंड और तीसरी बार में लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है। इसे भी पढ़ें: Air India Flight Turbulence Video | ‘लगा अब जिंदा नहीं बचेंगे…’, एयर इंडिया की फ्लाइट में मची चीख-पुकार, भयानक टर्बुलेंस का खौफनाक मंजर
मामले में जुड़ा नया मोड़
इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के नियमों के अनुसार, कोई भी पायलट ऐसे किसी भी नशीले या दिमाग पर असर डालने वाले पदार्थ के प्रभाव में विमान नहीं उड़ा सकता। जांच में आमतौर पर इस बात का ध्यान रखा जाता है कि आपात स्थिति में पायलट ने हालात को कैसे संभाला, लेकिन कैप्टन के डोप टेस्ट में पॉजिटिव आने से इस जांच में एक बेहद गंभीर मोड़ आ गया है।
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