आदित्य सिंह आजमगढ़ जिले के लालपुर गौहर गांव के निवासी हैं। वो चार भाई बहन हैं। उनके पिता एक किसान हैं और माता गृहणी हैं। आदित्य एक साधारण परिवार से आते हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें पढ़ाई के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
कौन हैं आदित्य सिंह
आदित्य सिंह आजमगढ़ जिले के लालपुर गौहर गांव के निवासी हैं। वो चार भाई बहन हैं। उनके पिता एक किसान हैं और माता गृहणी हैं। आदित्य एक साधारण परिवार से आते हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें पढ़ाई के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जब वो कक्षा 12वीं में तब उनके मन में आईएएस बनने का ख्याल आया है। हालांकि तब उन्हें इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि यूपीएससी में कितने पेपर होते हैं, या क्या सिलेबस होता है।
कहां से मिली प्रेरणा
एक इंटरव्यू में आदित्य सिंह बताते हैं कि उन्हें आईएएस बनने की प्रेरणा गांव और परिवार की समस्याओं को देखकर मिली। वो कहते हैं कि गांव में छोटे-छोटे स्कीम को लेकर कोई जागरुकता नहीं है। साथ ही गांव में इंफ्रा से लेकर कनेक्टिविटी तक कई सारी समस्याएं हैं। उनका मानना है कि इन सभी समस्याओं को एक अच्छा सिविल सर्वेंट ही खत्म कर सकता है। ऐसे में बचपन से ही दिमाग में ये था कि मुझे भी अच्छा सिविल सर्वेंट बनना है।
पिता जी का सबसे ज्यादा रहा योगदान
आदित्य सिंह की सफलता के पीछे कई लोगों का योगदान रहा। लेकिन सबसे ज्यादा योगदान उनके पिता जी का था। साथ ही छोटी बहन का भी खूब योगदान रहा। वो बताते है कि अगर किसी ने मेरी पूरी जर्नी को अच्छे तरीके से जाना है, तो मेरी छोटी दीदी है, जो अभी पढ़ाई कर रही है।
आजमगढ़ से प्रयागराज पहुंचे
आदित्य सिंह यूपीएससी की तैयारी के लिए आजमगढ़ से प्रयागराज पहुंचते हैं। हालांकि वो दिल्ली में पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति की वजह से उन्होंने प्रयागराज का चुनाव किया। यहां वो सलोरी में रहकर तैयारी करते थे। साथ ही उन्होंने दृष्टि कोचिंग संस्थान से पढ़ाई भी करते थे। आदित्य सिंह के कमरे से कोचिंग की दूरी करीब 7 किलोमीटर था। ऐसे में वो रोजाना साइकिल से कोचिंग जाया करते थे। उन्होंने ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में ये कोचिंग ज्वाइन की।
कितने घंटे पढ़ते थे आदित्य
यूपीएससी की तैयारी करने के लिए आदित्य सिंह करीब 8 से 9 घंटे रोजना पढ़ाई करते थे। हालांकि वो बताते हैं कि प्रीलिम्स के बाद पढ़ाई की टाइमिंग और मेहनत दोगुनी हो जाती है।
2024 में दिया पहला अटेम्प्ट
आदित्य सिंह हिंदी मीडियम के छात्र थे। उन्होंने अपना पहला अटेम्प्ट 2024 में दिया और उसमें उनका प्रीलिम्स हो गया। इसे बाद वो दिल्ली आए गए। यहां आने के बाद उन्होंने पिछली कमियों पर काम किया और उन्हें सुधारा।
पिछले कई सालों से नहीं मनाई दिवाली और होली
आदित्य सिंह बताते हैं कि यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने ना जाने कितने त्याग किए। वो पिछले कई सालों से होली और दिवाली जैसे त्योहारों में भी घर नहीं जाते थे। हालांकि उनकी मेहनत रंग लाई और दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी क्रैक किया। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में 508वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की है।
क्या थी यूपीएससी की तैयारी के लिए प्लानिंग
आदित्य सिंह ने बताया कि सबसे जरूरी है स्टडी मैटेरियल। आपको इनको एक बार बहुत ध्यान से चुन लेना है और इसी पर भरोसा करना है। साथ ही पीवाईक्यू का बहुत ज्यादा ध्यान रखें। वो बताते हैं कि अगर आप पीवाईक्यू नहीं देखते हैं, तो गलत डायरेक्शन में जाते हैं। इसके लिए खूब मेहनत करते रहिए। ऐसे में आदित्य सिंह की यह जर्नी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
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