क्या दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में करुण नायर को लेकर तिलक ब्रिगेड को पछताना पड़ेगा? करण को फाइनल में भी खेलने का मौका नहीं मिला। हालांकि, अनुभवी बल्लेबाज पत्ता कटने के बाद चमका।
‘करुण को बाहर रखना मुश्किल लेकिन…’
साउथ जोन ने पिछले सप्ताह बेंगलुरु के बीसीसीआई ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में खेले गए सेमीफाइनल में भी कर्नाटक के इस बल्लेबाज को टीम में शामिल नहीं किया था। साउथ जोन के कोच विक्रम वर्मा ने कहा, ”दरअसल हमने एक अच्छा संयोजन चुना था क्योंकि हर टीम में दो बाएं हाथ के स्पिनर हैं। इसलिए हमें लगा कि मध्यक्रम में बाएं हाथ का बल्लेबाज होने से हमें उन पर दबदबा बनाने का अच्छा मौका मिलेगा।” उन्होंने कहा, ”इसलिए हमने फिर वही सोचा कि टीम के लिए सबसे अच्छा क्या है। अब जबकि देवदत्त पडिक्कल वापस आ गए हैं तो टीम संयोजन का सवाल था। करुण को बाहर रखना बहुत मुश्किल है लेकिन हमारे पास यही संयोजन है।”
केवल ‘व्यक्तिगत कारण’ ही नहीं थे
करुण ने 2025-26 रणजी ट्रॉफी सत्र में कर्नाटक के लिए 699 रन बनाए थे। वह रविवार शाम बेंगलुरु के लिए रवाना होने वाली उड़ान से टीम से लौट गए थे। वर्मा ने करुण की अनुपस्थिति को ‘व्यक्तिगत कारणों’ से जोड़ा। उन्होंने कहा, ”वह घर पर व्यक्तिगत कारणों से वापस गए। उन्होंने हमें ईमेल किया और पारिवारिक कारणों से यात्रा की अनुमति ली।” हालांकि, अपने घरेलू शहर में आयोजित टूर्नामेंट में करुण की भागीदारी से संकेत मिलता है कि उनके नहीं खेलने के पीछे केवल ‘व्यक्तिगत कारण’ ही नहीं थे। करुण के शतक की बदौलत सचिव एकादश ने छत्तीसगढ़ के खिलाफ मुकाबले के पहले दिन 90 ओवर में नौ विकेट पर 277 रन बनाए। वहीं, सोमवार को लगातार दूसरे दिन साउथ जोन के गेंदबाज, विशेषकर मुख्य तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। सपाट पिच और उच्च स्तर की बल्लेबाजी के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर नजर आई।
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