कहां-कहां हुई गिरावट
इंडिया विक्स (बाजार में उतार-चढ़ाव नापने वाला इंडिकेटर) 3% से अधिक बढ़कर 11.86 पर पहुंच गया। निफ्टी आईटी सबसे बड़ा घाटे वाला सेक्टर रहा और 2% से अधिक टूटा। निफ्टी ऑटो और रियल्टी करीब 2% गिरे। निफ्टी एफएमसीजी और फाइनेंशियल सर्विसेज समेत कई दूसरे सेक्टर 1% टूटे।
किन शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?
इंफोसिस के शेयर करीब 3% टूटे और यह सेंसेक्स टॉप लूजर बनाटीसीएस, एचसीएल टेक, इंडिगो और एमएंडएम करीब 2% गिरे।एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, बीईएल, आईटीसी और अल्ट्राटेक 1% से अधिक गिरे। अब दोपहर में पावर ग्रिड, अडानी पोर्ट्स, आईटीसी और सनफार्मा हल्की बढ़त के साथ हरे निशान पर नजर आ रहे थे।
शेयर मर्केट में आज की गिरावट की 5 बड़े कारण
पहला कारण: ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा
अमेरिका और ईरान के बीच रातों-रात नए हमले हुए, जिससे मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा। अमेरिका ने ईरान में एयरस्ट्राइक किए, जिसका ईरान ने जवाब दिया। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा कि अमेरिकी हमले होर्मुज के रास्ते को और बंद कर देंगे। ईरान ने यह भी कहा कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमला किया है।
दूसरा कारण: तेल की कीमतें $96 बैरल के पार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड $96 प्रति बैरल से ऊपर चला गया, जबकि WTI क्रूड $91 के करीब कारोबार कर रहा था।
तीसरा कारण: दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड बढ़ी
मिडिल ईस्ट संघर्ष की वजह से तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे महंगाई और सरकारी कर्ज को लेकर डर बढ़ गया। अमेरिका की 10-साल की ट्रेजरी यील्ड 4.81% के करीब तीन साल के हाई पर पहुंच गई। जापान की 10-साल यील्ड 3% के साथ 30 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जबकि ऑस्ट्रेलिया की यील्ड 5.198% पर 15 साल के रिकॉर्ड पर जा पहुंची।
चौथा कारण: दुनिया भर के बाजार गिरे
दलाल स्ट्रीट पर गिरावट की शुरुआत वैश्विक बाजारों में नकारात्मक माहौल से हुई। अमेरिका में एसएंडपी 500 0.7% गिरा और नैस्डैक कंपोजिट 1% टूटा। एशियाई बाजार की बात करें तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 4% और जापान का निक्केई 3% टूटा। ताइवान, हॉन्गकॉन्ग और चीन के बाजार करीब 1% गिरे।
पांचवां कारण: कमजोर हुआ रुपया
तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के चलते रुपया 2 पैसे कमज़ोर होकर 94.97 प्रति डॉलर पर खुला। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल क्रूड, डॉलर की चाल और FII के पैसे पर निर्भर करेगी।
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