ऋषिकांत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर भारत को दूसरा मेडल दिलाया। इसके बाद मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल जीतकर पदकों की संख्या तीन कर दी है।
कौन है ऋषिकांत सिंह चानमबम
ऋषिकांत सिंह का जन्म 5 जुलाई 1998 को इंफाल वेस्ट के नगैरंगबम माखा मानिंग लेईकई में हुआ था। उनके पैरेंट्स चनाम्बम इराबोट और चनाम्बम जिनी देवी ने मणिपुर राज्य के इंफाल वेस्ट जिले में उनकी परवरिश हुई। कम उम्र में ही उनके परिवार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनका भरपूर समर्थन किया। उन्होंने वेटलिफ्टिंग में अपना करियर बनाने का मन बना लिया था और इम्फाल के खुमान लाम्पाक स्थित नेशनल स्पोर्ट्स अकादमी में अपने स्किल्स पर काम करना शुरू कर दिया था। सेना के अनुशासित माहौल ने उनकी निरंतरता, अनुशासन और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 28 वर्षीय एथलीट की असली सफलता तब मिली जब वह भारतीय सेना का हिस्सा बने।
करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
उन्होंने 2016 में जूनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप कांस्य पदक जीतकर अपनी एक अलग पहचान बनाई। इसके तीन साल बाद, उन्होंने 2019 की राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर सीनियर वर्ग में कदम रखा। ऋषिकांत ने बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 55 किग्रा वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। अहमदाबाद में आयोजित 2025 कॉमनवेल्थ भारोत्तोलन चैंपियनशिप उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक रहा। पुरुषों की 60 किलोग्राम श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करते हुए ऋषिकांत ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 271 किलोग्राम वजन उठाकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके इस प्रदर्शन ने न केवल कॉमनवेल्थ का खिताब सुरक्षित किया बल्कि इस वर्ग में एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया, जिससे उन्हें 2026 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सीधा क्वालीफिकेशन मिल गया।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.