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भारतीय सेना की मेजर स्वाति शांतकुमार ने दक्षिण सूडान के UN शांति मिशन में लैंगिक हिंसा के खिलाफ ‘इक्वल पार्टनर्स, लास्टिंग पीस’ पहल चलाकर वैश्विक पहचान बनाई है. बेंगलुरु की रहने वाली मेजर स्वाति को उनके मानवीय कार्यों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा सम्मानित किया गया है. कर्नल सोफिया और विंग कमांडर व्योमिका के बाद, उन्होंने शांति स्थापना को ‘बदलाव की एक श्रृंखला’ के रूप में परिभाषित कर देश का नाम रोशन किया है
मेजर स्वाति को बड़ा सम्मान मिला.
भारतीय सेना की बेटियां आज विश्व पटल पर अपनी बहादुरी और मानवीय दृष्टिकोण का लोहा मनवा रही हैं. कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह जैसी दिग्गज सैन्य अधिकारियों के पदचिह्नों पर चलते हुए अब मेजर स्वाति शांतकुमार का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंज रहा है. दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UNMISS) में तैनात 31 वर्षीय मेजर स्वाति लैंगिक हिंसा को संबोधित करने और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से शांति स्थापना के लिए सम्मानित किया गया.
बेंगलुरु से दक्षिण सूडान तक का सफर
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से ताल्लुक रखने वाली मेजर स्वाति का सैन्य सफर बेहद प्रेरणादायक है. सेना में आने से पहले उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आईबीएम (IBM) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में सिक्योरिटी एनालिस्ट के तौर पर काम किया. अपने पिता के सहयोग और लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने के संकल्प के साथ वह 8 साल पहले भारतीय सेना में शामिल हुईं. उनका मानना है कि “बदलाव लाने के लिए कोई भी व्यक्ति बहुत छोटा नहीं होता”.
UN मिशन और ‘इक्वल पार्टनर्स, लास्टिंग पीस’
मेजर स्वाति ने दक्षिण सूडान के मलाकल में भारत की पहली ऑल-वमेन मिलिट्री एंगेजमेंट टीम का नेतृत्व किया. उन्होंने वहां लैंगिक आधार पर होने वाली हिंसा के खिलाफ मोर्चा खोला. उनकी प्रमुख पहल इक्वल पार्टनर्स, लास्टिंग पीस के तहत पुरुष और महिला सैनिकों की मिश्रित गश्त शुरू की गई.
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