चांदीपुरा वायरस का कहर गुजरात के बाद अब राजस्थान तक आ गया है। बच्चों के लिए ये वायरस सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। चलिए आपको इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके बताते हैं।
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) की पहचान पहली बार साल 1965 में भारत में हुई थी। यह वायरस महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में तेज बुखार के मरीजों के खून के नमूनों से मिला था। इसी गांव के नाम पर इस वायरस का नाम चांदीपुरा पड़ा। इसके बाद यह वायरस 2003 में चर्चा में आया, जब आंध्र प्रदेश में बच्चों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस (Acute Encephalitis Syndrome – AES) का बड़ा प्रकोप हुआ और कई बच्चों की मौत हुई। इसके बाद 2004 में गुजरात समेत पश्चिम और मध्य भारत के कई राज्यों में भी इसके मामले दर्ज किए गए थे।
क्या होता है इस कीड़े के काटने से?
चांदीपुरा वायरस सैंडफ्लाई (Sandfly) के काटने पर शरीर में घुसता है। इससे तेज बुखार और दिमाग में सूजन हो सकती है। संक्रमण होने पर वायरस तेजी से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है और इससे दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) हो सकती है। ब्रेन सोचने, याद रखने, बोलने, भावनाओं, सीखने और शरीर की कई चीजों को कंट्रोल करता है। ऐसे में दिमाग पर सूजन आने से सभी पर असर पड़ता है।
क्या है शुरुआती लक्षण
इस वायरस से सबसे ज्यादा 15 साल से कम उम्र वाले बच्चों को खतरा होता है। गांव या मिट्टी वाले क्षेत्रों में सैंडफ्लाई वायरस ज्यादा होते हैं। बारिश के मौसम में इन कीटों की संख्या बढ़ जाती है। आइये इसके कुछ शुरुआती लक्षण जानते हैं-
-तेज बुखार
-कोमा जैसी गंभीर स्थिति
बचाव के तरीके भी जान लें
- मिट्टी वाली जगहों पर बच्चों को खेलने के लिए न भेजें।
- फुल बाजू और पैंट वाले कपड़े पहनाएं।
- मच्छरदानी और कीट-रोधी (Insect Repellent) का इस्तेमाल करें।
- घर के आस-पास साफ-सफाई रखें।
- बच्चे में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।
- लक्षण दिखने पर किसी झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, ये वायरस तेजी से फैलता है।
नोट- यह खबर सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।
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