आज के समय में एक से ज्यादा भाषाएं जानना और बोलना छात्रों के लिए एक जरूरी स्किल बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू की है।
क्या है CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी?
तीन-भाषा नियम के तहत अब छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इनमें हिंदी, क्षेत्रीय भाषाएंया शास्त्रीय भाषाएं शामिल हो सकती हैं। यह व्यवस्था 2026-27 शैक्षणिक सत्र से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। इसके लिए CBSE सभी संबद्ध स्कूलों को सर्कुलर जारी कर चुका है। बोर्ड ने कहा है कि भाषा शिक्षा अब NCERT के नए पाठ्यक्रम के अनुसार होगी।
क्या विदेशी भाषा भी चुन सकते हैं?
विद्यार्थी फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं को पढ़ सकेंगे, लेकिन कुछ शर्तों के साथ।
तीसरी भाषा (R3) के रूप में विदेशी भाषा तभी चुन सकेंगे, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों।
विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा (Fourth Language) के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।
इस नई व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से अंग्रेजी को भी ‘विदेशी भाषा’ की श्रेणी में रखा जाएगा।
क्या R3 की बोर्ड परीक्षा होगी?
परीक्षा के दबाव को लेकर चिंतित छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। R3 का मूल्यांकन संबंधित स्कूल अपने स्तर पर करेंगे और उसके अंक/ग्रेड CBSE के प्रमाणपत्र में दर्ज किए जाएंगे। CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल R3 के कारण किसी भी छात्र को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका जाएगा।
किन छात्रों पर लागू होगी नई व्यवस्था?
CBSE ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कक्षा 10 के छात्रों पर नई नीति लागू नहीं होगी। वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को भी कक्षा 10 में R3 की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2026-27 में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्र इस व्यवस्था के पहले बैच होंगे। यही बैच वर्ष 2031 में पहली बार R3 की बोर्ड परीक्षा देगा।
क्या इससे पढ़ाई का बोझ बढ़ेगा?
CBSE का कहना है कि तीन-भाषा व्यवस्था छात्रों पर एक्स्ट्रा पढ़ाई का बोझ नहीं डालेगी, बल्कि भाषा सीखने का संतुलित तरीका अपनाएगी। इसमें रटने के बजाय भाषा को समझने, संवाद करने, उसका सही उपयोग करने और अपने विचार प्रभावी ढंग से व्यक्त करने पर जोर दिया जाएगा। इस पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्र पढ़ने, कहानी सुनाने, वाद-विवाद, समूह चर्चा और प्रेजेंटेशन जैसी गतिविधियों के माध्यम से भाषाएं सीख सकें। इसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी, आत्मविश्वासी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप वैश्विक नागरिक बनाना है।
पैरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान
CBSE का कहना है कि पैरेंट्स को यह समझना चाहिए कि नई तीन-भाषा नीति का उद्देश्य केवल छात्रों को ज्यादा भाषाएं सिखाना नहीं है। इसका मकसद बच्चों को सोचने, अपनी बात बेहतर ढंग से व्यक्त करने, दूसरों से जुड़ने और प्रभावी ढंग से संवाद करने के अधिक अवसर देना है। यदि अभिभावकों को इस नई व्यवस्था से जुड़ी किसी भी जानकारी की पुष्टि करनी हो, तो वे सीधे अपने बच्चे के स्कूल से संपर्क करें और यह जानें कि वहां तीसरी भाषा (R3) के कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं। साथ ही, सही और आधिकारिक जानकारी के लिए केवल CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सर्कुलर देखें। सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट या भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें।
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