आमतौर पर लोग एक या दो डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी और करियर पर ध्यान देने लगते हैं. लेकिन न्यूजीलैंड के जेमी बीटन की कहानी इससे बिल्कुल अलग है. 31 साल की उम्र में वह कई बड़ी यूनिवर्सिटीज से 12 डिग्रियां हासिल कर चुके हैं और अभी भी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं. उन्होंने हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, येल और ऑक्सफोर्ड जैसी दुनिया की मशहूर यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई की है. खास बात यह है कि पढ़ाई के साथ उन्होंने अपना कारोबार भी खड़ा किया. जेमी बीटन शिक्षा से जुड़ी कंपनी क्रिमसन एजुकेशन के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं.
हार्वर्ड से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर
जेमी बीटन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई शुरू की. यहां उन्होंने गणित और अर्थशास्त्र से जुड़ी पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से प्रबंधन और शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाई की. स्टैनफोर्ड के बाद उनका रुख ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर हुआ, जहां उन्होंने सार्वजनिक नीति में शोध की डिग्री हासिल की. वह रोड्स छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों में भी शामिल रहे. इसके बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी. उन्होंने चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी से वैश्विक मामलों में मास्टर डिग्री और येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की. इसके अलावा पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, किंग्स कॉलेज लंदन और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से भी उन्होंने पढ़ाई की है. उनकी पढ़ाई में गणित, शिक्षा, कानून, सार्वजनिक नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसे अलग-अलग विषय शामिल हैं.
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पढ़ाई के साथ खड़ी की बड़ी कंपनी
जेमी बीटन सिर्फ अपनी डिग्रियों की वजह से ही चर्चा में नहीं हैं. उन्होंने साल 2013 में क्रिमसन एजुकेशन की शुरुआत की थी. यह कंपनी छात्रों को दुनिया की बड़ी यूनिवर्सिटीज में दाखिले की तैयारी में मदद करती है. कंपनी शुरू करने के समय जेमी खुद भी छात्र थे. धीरे-धीरे उनकी कंपनी का कारोबार कई देशों तक पहुंच गया. साल 2024 में क्रिमसन एजुकेशन की कीमत करीब 1 अरब डॉलर आंकी गई थी. जेमी आज इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं. यानी एक तरफ वह लगातार पढ़ाई कर रहे हैं और दूसरी तरफ एक बड़ी शिक्षा कंपनी भी चला रहे हैं.
दुनिया का सबसे पढ़ा-लिखा इंसान बनने की चाहत
जेमी बीटन की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने अलग-अलग विषयों में पढ़ाई की है. उनकी कई डिग्रियां दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज से हैं. हालिया रिपोर्टों में उन्हें दुनिया का सबसे पढ़ा-लिखा व्यक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ता हुआ बताया गया है. हालांकि अभी उन्हें आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे पढ़ा-लिखा व्यक्ति घोषित करने वाला कोई विश्व रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. जेमी का मानना है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. यही वजह है कि वह पढ़ाई को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी कहानी यह दिखाती है कि कोई व्यक्ति अपने करियर के साथ अपनी पढ़ाई को भी लंबे समय तक जारी रख सकता है. हालांकि इतनी सारी डिग्रियां हासिल करना हर किसी के लिए जरूरी नहीं है. अपनी रुचि और जरूरत के हिसाब से सही विषय चुनना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है.
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