आरोपी ने निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, 16 फरवरी 2026 को जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि रेप साबित करने के लिए पेनिट्रेशन का प्रमाण जरूरी है, भले ही वह आंशिक ही क्यों न हो, कोर्ट के मुताबिक उपलब्ध सबूत रेप की पूरी तरह पुष्टि नहीं करते लेकिन रेप की कोशिश साबित करते हैं। इसके बाद सजा सात साल से घटाकर तीन साल छह महीने का कठोर कारावास कर दी गई है इसके साथ ही 200 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले के बाद विशाल ददलानी ने इंस्टाग्राम पर लिव लॉन्ग का एक ट्वीट शेयर किया है, जिसमें लिखा था कि पेनिस को वजाइना के ऊपर रखना और बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं है। इस पर विशाल ने हैरानी जताते हुए लिखा कि क्या सच में, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे जजों के नाम और तस्वीरें फैसलों के साथ सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि लोग जान सकें कि फैसले देने वाले क्या सोचते हैं, साथ ही उन्होंने हैशटैग के जरिए इसे रेपिस्ट बचाओ अभियान बताया है।
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