अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। दोनों अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरू मध्य में हाल ही में हुई घटनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरू मध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकेबंदी (blockade) का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध परिवहन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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गौरतलब है कि होर्मुज के समंदर में अमेरिका ने वो कायराना हरकत की जिसने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत के तीन जांबाज नाविकों की जान चली गई और वजह महाशक्ति होने का अहंकार। ये दिन इतिहास में अमेरिका की उस सशस्त्र डकैती के नाम पर दर्ज होगा जिसने तीन भारतीय परिवारों को उम्र भर का दर्द दे दिया। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती है। अमेरिका ने सोचा था कि वह झूठ बोलेगा और भारत मान लेगा।
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ट्रंप ने ईरान पर उंगली उठाई। लेकिन भारत ने उसी उंगली को मरोड़कर अमेरिका को आईना दिखा दिया और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आधी रात को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को फोन पर जो सुनाया उसे सुनकर वाशिंगटन के गलियारों में सन्नाटा पसर गया। ओमान की खाड़ी तेल टैंकर एम्प्टी सिट्टे बेलो शांति से अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ रहा था। इस जहाज पर कोई लड़ाकू विमान नहीं था। कोई मिसाइलें नहीं थी। इस पर सवार थे 24 भारतीय नागरिक जो अपने घर बार से दूर समंदर के सीने पर मेहनत कर रहे थे। तभी अचानक अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने इस कमर्शियल जहाज को घेर लिया। बिना किसी चेतावनी के, बिना किसी ठोस वजह के अमेरिका ने इस शांतिपूर्ण जहाज पर हमला कर दिया। गोलों की उस बरसात में जहाज दहल उठा और हमारे 21 भारतीय भाइयों ने मौत को करीब से देखा और किसी तरह अपनी जान बचाई। लेकिन तीन भारतीयों की जान इस अमेरिकी सनक में भेंट चढ़ गई।
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