अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में नया बड़ा हमला हुआ है. ईरान ने फारस की खाड़ी में दो विदेशी तेल टैंकरों पर हमला कर दिया, जिसमें एक अमेरिकी कंपनी का जहाज भी शामिल है. हमलों से जहाजों में भीषण आग लग गई, एक व्यक्ति की मौत हो गई और 38 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचाया गया. ईरान ने खुद इन हमलों की जिम्मेदारी ली है.
ईरान ने अंडरवॉटर ड्रोन से किया हमला
ईरानी राज्य प्रसारक IRIB के मुताबिक, पानी के नीचे से ड्रोन (अंडरवॉटर ड्रोन) से हमला किया गया, जिससे दोनों टैंकर उड़ गए. हमला इराक के क्षेत्रीय पानी में बासरा के पास हुआ. जहाजों के नाम हैं:
- Safesea Vishnu (मार्शल आइलैंड्स फ्लैग वाला, अमेरिकी कंपनी Safesea Transport Inc. का स्वामित्व)
- Zefyros (माल्टीज फ्लैग वाला, यूनानी मालिक)
हमला ऐसे वक्त में हुआ जब ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी जहाज को आग लगा दी जाएगी. ईरान का कहना है कि वो किसी भी जहाज को नहीं छोड़ेगा जो अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगियों का तेल ले जा रहा हो. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट है, जहां से रोजाना करीब 20% वैश्विक तेल (लगभग 13 मिलियन बैरल) गुजरता है.
ट्रंप के दावे के बाद भी ईरान के हमले जारी
इस हमले से पहले अमेरिका ने दावा किया था कि उसकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास 16 ईरानी माइन-लेइंग जहाजों को नष्ट कर दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को ‘इतना जोर से मारा है जितना इतिहास में किसी देश को नहीं मारा गया’, और युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा क्योंकि ‘ईरान में टारगेट करने लायक कुछ बचा ही नहीं.’ इसके बावजूद ईरान अब भी हमले कर रहा है.
युद्ध अब 12वें दिन में पहुंच गया है. अमेरिका और इजरायल के ऑपरेशन ‘Epic Fury’ के जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों पर ड्रोन-मिसाइल अटैक किए. इससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और शिपिंग ट्रैफिक लगभग रुक गया है. दुनिया के बड़े देश जैसे चीन, भारत और जापान पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.
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