Stryker Wiper Malware Attack : अमेरिकी कंपनी स्ट्राइकर पर वाइपर (Wiper) मालवेयर से हमला हुआ है. यह ऑपरेटिंग सिस्टम की महत्वपूर्ण फाइलों को खराब कर देता है, जिससे कंप्यूटर या सर्वर ‘बूट’ होना भी बंद कर देते हैं.
वाइपर हमलों का इस्तेमाल अक्सर भू-राजनीतिक तनाव के दौरान ‘साइबर युद्ध’ के रूप में किया जाता है. (फोटो : एआई)
स्ट्राइकर पर वाइपर (Wiper) मालवेयर से हमला हुआ है. यह रैनसमवेयर हमला नहीं है. रैनसमवेयर अटैक में डेटा चुराकर पैसे (फिरौती) की मांग की जाती है. लेकिन वाइपर अटैक का मकसद इससे कहीं अधिक खतरनाक और विनाशकारी होता है. रैनसमवेयर का मकसद पैसा कमाना होता है, लेकिन वाइपर का एकमात्र उद्देश्य डेटा को पूरी तरह नष्ट करना होता है. यह मालवेयर टारगेटिड सिस्टम की फाइलों को मिटा देता है या उन्हें इस कदर ओवरराइट (Overwrite) कर देता है कि उन्हें दोबारा प्राप्त करना नामुमकिन हो जाता है.
उड़ा देता है डेटा
यह ऑपरेटिंग सिस्टम की महत्वपूर्ण फाइलों को खराब कर देता है, जिससे कंप्यूटर या सर्वर ‘बूट’ (Start) होना भी बंद कर देते हैं. स्ट्राइकर के मामले में भी हैकरों ने Microsoft Intune जैसे वैध टूल्स का इस्तेमाल कर रिमोट तरीके से डिवाइसों को वाइप करने की कोशिश की. हैकर समूह का दावा है कि उन्होंने स्ट्राइकर के लगभग 50 टेराबाइट डेटा पर कब्जा कर लिया है. इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी के कर्मचारी न तो आपस में संचार कर पा रहे थे और न ही जीवन रक्षक मेडिकल उपकरणों का निर्माण या वितरण कर पा रहे थे.
साइबर युद्ध का नया हथियार है वाइपर
वाइपर हमलों का इस्तेमाल अक्सर भू-राजनीतिक तनाव के दौरान ‘साइबर युद्ध’ के रूप में किया जाता है. CaddyWiper, HermeticWiper और FoxBlade जैसे वाइपर मालवेयर यूक्रेन युद्ध के दौरान देखे गए थे. स्ट्राइकर पर हुआ यह हमला भी राजनीतिक प्रतिशोध की ओर इशारा करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक ‘डिस्ट्रक्टिव अटैक’ है, जिसका लक्ष्य कंपनी को वित्तीय क्षति पहुंचाना और अराजकता फैलाना है.
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