MDR क्या है और इसका खर्च कौन उठाएगा?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है जो कोई व्यापारी (Merchant) अपने ग्राहकों से डिजिटल माध्यमों (जैसे UPI, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड) के ज़रिए भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (PSP) को देता है। वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर साफ़ किया है: “बैंकों और यूपीआई ऐप प्रोवाइडर्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे मर्चेंट्स को यह चार्ज ग्राहकों से वसूलने की अनुमति न दें। ऐप्स को किसी भी प्रकार की छिपी हुई फ़ीस या प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस लगाने से स्पष्ट रूप से मना किया गया है।”
आम जनता (Users) और छोटे कारोबारियों के लिए 100% मुफ़्त (Zero MDR Category)
आम उपभोक्ताओं के रोज़मर्रा के लेन-देन को इस नीतिगत फैसले से पूरी तरह सुरक्षित और मुफ़्त रखा गया है:
पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांज़ैक्शन:
दोस्तों, परिवार या किसी भी अन्य व्यक्ति को सीधे बैंक खाते में या UPI ID पर भेजे गए पैसे पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। चाहे राशि कितनी भी हो (जैसे ₹100 से लेकर ₹1,000,000 तक), P2P ट्रांसफर पूरी तरह मुफ़्त रहेंगे। यह कुल UPI वॉल्यूम का लगभग 70% हिस्सा है।
₹2,000 तक की मर्चेंट खरीदारी (P2M):
किसी भी दुकान, मॉल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले ₹2,000 तक के भुगतानों पर शून्य (Zero) MDR लागू होगा।
छोटे व्यापारी और स्ट्रीट वेंडर्स (P2PM Category):
सब्जी विक्रेता, चाय की दुकानें, छोटे किराना स्टोर और स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर्स जो UPI QR कोड के माध्यम से महीने में ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करते हैं, उनके किसी भी लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा।
ऑटो-डेबिट और मैंडेट्स (UPI Auto-Pay):
मंथली यूटिलिटी बिल, OTT प्लेटफॉर्म सब्सक्रिप्शन (जैसे Netflix, Prime), म्यूचुअल फंड SIP, और लोन EMI के लिए सेट किए गए स्वचालित भुगतानों पर MDR लागू नहीं होगा।
आवश्यक व सार्वजनिक सेवाओं पर लागू ₹5 का फिक्स्ड (Flat) MDR नियम
कम-मार्जिन और जन-सुविधा वाले क्षेत्रों में लागत को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से 2,000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर 0.4% के प्रतिशत-आधारित शुल्क के स्थान पर 5 रुपये का फिक्स्ड (फ्लैट) MDR तय किया गया है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि बड़ी राशि के डिजिटल भुगतानों पर भी प्रोसेसिंग लागत सीमित रहे।
इस नियम के तहत, यदि कोई उपभोक्ता रेलवे के IRCTC पोर्टल या ऑफलाइन टिकट काउंटर से 2,000 रुपये से अधिक का टिकट UPI से बुक करता है, तो रेलवे को प्रति ट्रांज़ैक्शन केवल 5 रुपये का फ्लैट शुल्क देना होगा। इसी प्रकार, पेट्रोल पंप ऑपरेटरों को राहत देते हुए 2,000 रुपये से अधिक के ईंधन भुगतान पर 5 रुपये का फिक्स्ड MDR निर्धारित किया गया है, जबकि 2,000 रुपये से कम के भुगतान पर यह शुल्क शून्य रहेगा।
इसके अतिरिक्त, बिजली बोर्ड, नगर निगम वॉटर टैक्स और पाइप प्राकृतिक गैस (PNG) जैसी आवश्यक सार्वजनिक यूटिलिटी सेवाओं के साथ-साथ बीमा किस्तों (इंश्योरेंस प्रीमियम) के 2,000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर भी संबंधित कंपनियों व निकायों को प्रति लेन-देन केवल 5 रुपये की दर से ही भुगतान करना होगा। इस पूरे फिक्स्ड शुल्क का वहन संबंधित संस्थाएं और मर्चेंट स्वयं करेंगे; आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा।
कमर्शियल, ई-कॉमर्स और कैपिटल मार्केट लेन-देन (विशेष दरें)
बड़ी कमर्शियल संस्थाओं और वित्तीय बाजारों के लिए दरों को पारदर्शी और कैप्ड (Capped) रखा गया है:
बड़े रिटेलर्स, ऑनलाइन शॉपिंग और रेस्टोरेंट्स:
₹2,000 से अधिक के शॉपिंग, फ़ूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स भुगतानों पर 0.4% MDR लागू होगा। हालांकि, मर्चेंट के लिए इस शुल्क की अधिकतम सीमा (Caping) ₹300 तय की गई है।
कैपिटल मार्केट (म्यूचुअल फंड व शेयर्स):
SEBI-रजिस्टर्ड स्टॉकब्रोकर्स, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) और डिमैट वॉलेट टॉप-अप पर केवल 0.02% MDR लागू होगा (अधिकतम ₹300)। यह रियायती दर आम निवेशकों को शेयर बाजार में भागीदारी बढ़ाने के लिए दी गई है।
शिक्षा शुल्क (Education Fees):
स्कूल ट्यूशन, यूनिवर्सिटी फीस और प्रवेश परीक्षाओं के लिए ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर रियायती कैप्ड दरें लागू होंगी, ताकि शिक्षण संस्थानों पर भारी प्रतिशत-आधारित बोझ न पड़े।
अंतिम निष्कर्ष और सरकारी निर्देश
वित्त मंत्रालय और NPCI ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यापारी या UPI ऐप (Google Pay, PhonePe, Paytm आदि) इस MDR शुल्क को ग्राहक से ‘कन्वीनियंस फीस’ या ‘प्लेटफॉर्म चार्ज’ के रूप में नहीं वसूल सकता। यह नया ढांचा केवल डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बड़े व्यापारियों से लिया जाने वाला मर्चेंट चार्ज है।
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