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अब सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 करने से, ₹15,000 से ₹25,000 प्रति माह वेतन पाने वाले कर्मचारी कानूनी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के दायरे में आ जाएंगे। इस कदम से प्रॉविडेंट फंड की बचत, एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत इंश्योरेंस सुरक्षा तक पहुंच बढ़ेगी, जो स्कीम के नियमों के अधीन होगी। EPFO वेतन सीमा में आखिरी बार सितंबर 2014 में बदलाव किया गया था, जब इसे बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। उससे पहले, 2004 से 2014 के बीच यह सीमा बदली नहीं गई थी। सरकार ने कहा कि हालिया बदलाव से पता चलता है कि इस दौरान मज़दूरी में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लोगों की आय बढ़ी है और औपचारिक रोज़गार का दायरा बढ़ा है।
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इस बढ़ोतरी के बाद सरकार का सालाना खर्च लगभग 11,339 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि अभी यह सालाना बजट सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। पांच साल में कुल अनुमानित खर्च लगभग 56,696 करोड़ रुपये है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से रोज़गार के औपचारिक होने में मदद मिलेगी, रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा बेहतर होगी और पोर्टेबल कानूनी सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुंच बढ़ेगी। EPFO अभी एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड, एम्प्लॉई पेंशन स्कीम और एम्प्लॉई डिपॉज़िट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम का प्रबंधन करता है। सरकार द्वारा बताए गए EPFO के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, संगठन के पास लगभग 7.68 लाख योगदान करने वाले प्रतिष्ठानों में लगभग 7.98 करोड़ योगदान करने वाले सदस्य हैं, जबकि EPS लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन का लाभ देता है।
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