लोकसभा में समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद जिया उर रहमान ने वित्त मंत्री से कच्चे तेल की कीमतों को लेकर सवाल किया. सपा सांसद ने पूछा कि क्या सरकार ने बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का देश में मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा की है और यदि हां, तो इसके विवरण क्या हैं?
इसके अलावा, मुद्रास्फीति के दबाव को प्रबंधित करने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे सुधारात्मक कदमों के विवरण क्या हैं और क्या सरकार द्वारा आम उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए कोई वित्तीय उपाय प्रस्तावित किए गए हैं और यदि हां, तो इसके विवरण क्या हैं?
केंद्रीय वित्त मंत्री ने सपा सांसद के सवाल का दिया जवाब
सपा सांसद के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल और भारतीय बास्केट की कीमतें पिछले एक साल से घट रही थीं, जब तक कि 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष शुरू नहीं हुआ. फरवरी के अंत से 2 मार्च 2026 तक, कच्चे तेल की कीमत (भारतीय बास्केट) 69.01 डॉलर/बैरल से बढ़कर 80.16 डॉलर/बैरल हो गई. चूंकि भारत की मुद्रास्फीति निचले स्तर पर है, इसलिए इस समय मुद्रास्फीति पर प्रभाव बहुत अधिक होने का अनुमान नहीं है.
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें अनुमान से 10 प्रतिशत अधिक होती हैं और इसका पूरा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है, तो मुद्रास्फीति 30 आधार अंक अधिक हो सकती है. हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का मुद्रास्फीति पर मध्यम अवधि का प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें विनिमय दर, वैश्विक मांग और आपूर्ति, मौद्रिक नीति, सामान्य मुद्रास्फीति की स्थिति और असर की दर शामिल है.
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने कहा कि औसत खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) 2023-24 में 5.4% से घटकर 2024-25 में 4.6% और 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में 1.8% हो गई. जनवरी 2026 में मुद्रास्फीति 2.75% थी, जो RBI के 4% ± 2% के लक्ष्य के निचले स्तर के करीब है. मुद्रास्फीति प्रबंधन के लिए, फरवरी 2025 से अब तक RBI की मौद्रिक नीति समिति ने कुल 125 आधार अंक की कटौती की है.
वित्त मंत्री ने लोकसभा में दी जानकारी
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार ने भी कई प्रशासनिक, वित्तीय और व्यापारिक नीतिगत कदम उठाए हैं, जिनमें आवश्यक खाद्य वस्तुओं के भंडार में वृद्धि, खुले बाजार में अनाज की बिक्री, आयात को बढ़ावा देना, निर्यात पर रोक, स्टॉक सीमा लागू करना, भारत ब्रांड के तहत सस्ती दरों पर खाद्य वस्तुओं की बिक्री, खराब होने वाली वस्तुओं के लिए बाजार में हस्तक्षेप, ईंधन करों में कटौती, भंडारण क्षमता बढ़ाना और आयकर छूट शामिल हैं.
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