भारत में मिश्रित मार्शल आर्ट का नाम तेजी से बढ़ रहा है और इसी बदलाव की सबसे मजबूत पहचान बनकर सामने आई हैं भारतीय खिलाड़ी पूजा तोमर। यूएफसी में मुकाबला जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन चुकी पूजा अब सिर्फ अपने करियर पर ही नहीं, बल्कि देश में इस खेल के भविष्य पर भी खुलकर बात कर रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बुधाना से आने वाली पूजा तोमर ने अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई हैं। पांच बार की वुशु राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी पूजा ने यूएफसी में जीत हासिल कर भारतीय खेल जगत में नया इतिहास रचा था।
पूजा का कहना है कि वह सिर्फ जीत और हार पर ध्यान नहीं देतीं, बल्कि हर मुकाबले को खुद को बेहतर बनाने का मौका मानती हैं। उन्होंने कहा कि पिछली हार से उन्हें अपनी कमजोरियों को समझने का अवसर मिला और अब उनका लक्ष्य पहले से ज्यादा मजबूत प्रदर्शन करना हैं।
गौरतलब है कि भारत में मिश्रित मार्शल आर्ट का खेल अभी शुरुआती दौर में माना जाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है और कई भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे हैं। पूजा तोमर का मानना है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों को सही माहौल और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
उन्होंने कहा कि देश में मजबूत आधार स्तर की व्यवस्था, बेहतर प्रशिक्षकों, अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का अनुभव और लगातार समर्थन की जरूरत है। पूजा के मुताबिक यूएफसी जैसे बड़े मंच पर मुकाबला करना बेहद कठिन होता है, क्योंकि वहां खिलाड़ी वर्षों की पेशेवर तैयारी और मजबूत टीमों के साथ उतरते हैं।
बता दें कि महिला खिलाड़ियों के लिए यह सफर और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहता है। पूजा ने कहा कि पहले लड़कियों को सीमित मौके मिलते थे और सामाजिक सोच भी बड़ी बाधा बनती थी। हालांकि अब स्थिति बदल रही है और ज्यादा लड़कियां आत्मविश्वास के साथ इस खेल में कदम रख रही हैं।
पूजा तोमर ने कहा कि अगर सही निवेश और समर्थन मिला तो भारतीय महिला खिलाड़ी आने वाले समय में दुनिया भर में बड़ा नाम बना सकती हैं। उन्होंने खुद को इस बदलाव का हिस्सा बताते हुए कहा कि वह आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ते खोलना चाहती हैं।
इसी सोच के साथ पूजा भविष्य में भारत में अपना प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहतीं, बल्कि ऐसा मजबूत और पेशेवर केंद्र बनाना चाहती हैं जहां युवा खिलाड़ियों को सही दिशा और प्रशिक्षण मिल सके।
पूजा का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ चैंपियन तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे खिलाड़ी बनाना है जो मानसिक रूप से मजबूत हों और दुनिया के बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें।
गौरतलब है कि इस साल एशियाई खेलों में पहली बार मिश्रित मार्शल आर्ट को शामिल किया जा रहा है। इसे खेल के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। पूजा का मानना है कि इससे इस खेल को नई पहचान मिलेगी और भविष्य में इसे ओलंपिक में भी शामिल किया जा सकता हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कभी मिक्स मार्शल आर्ट ओलंपिक का हिस्सा बनता है तो भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना होगा। पूजा के मुताबिक ओलंपिक में भारतीय झंडे के साथ उतरना किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा गर्व का पल होता है।
अब पूजा तोमर 29 मई को मकाऊ में होने वाले मुकाबले की तैयारी में जुटी हुई हैं। हालांकि उनके लिए हर मुकाबला सिर्फ जीत दर्ज करने का मौका नहीं, बल्कि भारत का नाम दुनिया भर में ऊंचा करने का एक और अवसर भी है।
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