Uber का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कंपनी को अपने कारोबार को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर अमेरिका में Waymo जैसी बिना ड्राइवर वाली राइड-हेलिंग सेवा कंपनियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। बिना ड्राइवर चलने वाली टैक्सी सेवाओं को भविष्य में पारंपरिक ऐप-कैब कारोबार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इस चिंता का असर Uber के शेयर पर भी देखने को मिला और कंपनी के शेयर में करीब 8 फीसदी तक गिरावट आई थी। इसके अलावा शेयर ने व्यापक S&P 500 इंडेक्स की तुलना में भी कमजोर प्रदर्शन किया है। ऐसे माहौल में Uber अब अपने संगठन को ज्यादा तेज और कम खर्चीला बनाने की कोशिश कर रही है।
Uber के CEO डारा दारा खोसरोशाही (Dara Khosrowshahi) ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा कि पिछले कुछ सालों में कंपनी के तेजी से विस्तार के कारण संगठन में कई अतिरिक्त स्तर बन गए हैं। इससे फैसले लेने की प्रक्रिया धीमी हुई और कई कर्मचारी ऐसे काम में लगे थे जिनका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग टीमों के बीच तालमेल बैठाना था। कंपनी अब ऐसे छोटे-छोटे समूहों को कम करेगी, जिनमें सिर्फ एक या दो कर्मचारी हैं। साथ ही CEO से 7 या उससे ज्यादा स्तर नीचे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी घटाई जाएगी। Uber अपने इंजीनियरिंग, साइंस और डिलीवरी से जुड़े प्रमुख विभागों को भी ज्यादा सरल बना रही है। इसके तहत रेस्टोरेंट, रिटेल और व्हाइट-लेबल डिलीवरी से जुड़ी तीन ऑपरेशंस टीमों को मिलाने की योजना है।
खोसरौशाही (Khosrowshahi) का कहना है कि इस रीस्ट्रक्चरिंग से होने वाली बचत को कंपनी दोबारा ग्रोथ, इनोवेशन और नई तकनीकों में लगाएगी। Uber ड्राइवरों, डिलीवरी कूरियर्स और दुनियाभर के मर्चेंट्स के लिए ज्यादा निवेश करने की योजना बना रही है। साथ ही कंपनी अपने मौजूदा कारोबार को मजबूत करने और भविष्य में ऑटोनॉमस यानी बिना ड्राइवर वाली सेवाओं के लिए भी तैयारी कर रही है।
CEO ने अपने संदेश में AI का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया, लेकिन कंपनी के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में भी बदलाव किए जा रहे हैं। यह छंटनी अमेरिका समेत उन दूसरे देशों में भी होगी, जहां Uber अपना कारोबार चलाती है। दिलचस्प बात यह है कि छंटनी की खबर सामने आने के बाद शुरुआती कारोबार में Uber के शेयर करीब 2 फीसदी चढ़ गए। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने कंपनी के लागत घटाने और संगठन को ज्यादा कुशल बनाने के फैसले को फिलहाल सकारात्मक रूप में लिया है। Uber के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह कम कर्मचारियों के साथ कारोबार को तेजी से बढ़ाने के साथ-साथ Waymo जैसी कंपनियों से मिलने वाली भविष्य की चुनौती का सामना कैसे करती है।
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