बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान के प्रधानमंत्री का पद संभालते ही तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने अपने बेटे को ढाका के दौरे पर भेज दिया. प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान से ढाका में मिलने वाले टर्किश प्रेजीडेंट के बेटे बिलाल एर्दोगन पहले विदेशी नेता हैं. खास बात ये है कि उनके साथ टर्किश कॉर्पोरेशन और कॉर्डिनेशन एजेंसी यानी TIKA के अध्यक्ष अब्दुल्लाह एरेन और मशहूर फुटबॉलर मेसुत ओजिल भी मौजूद थे.
बिलाल एर्दोगन की बांग्लादेश यात्रा का आधिकारिक तौर पर पहले से कोई ऐलान नहीं किया गया था. तारिक रहमान के सत्ता संभालते ही तुर्किए का यह रुख भारत को परेशान करने वाला है. भारत ने हमेशा तुर्किए के साथ अच्छे ताल्लुक रखे, ऐसे समय में उसकी मदद की जब वह भूकंप की वजह से बेहद खराब स्थिति से गुजर रहा था. हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किए ने जिस तरह हथियार भेजकर पाकिस्तान की मदद की, वो हरकत भारत की पीठ में छुरा घोंपने जैसी है. यही वजह है कि बिलाल एर्दोगन की इस विजिट को बेहद गंभीरता से देखा जा रहा है. मोहम्मद यूनुस के दौर में भी तुर्किए की बांग्लादेश से नजदीकियां काफी बढ़ गई थीं.
इस दौरे का मुख्य एजेंडा तारिक रहमान से मुलाकात था. बांग्लादेश की मीडिया के अनुसार दोनों नेताओं के बीच तुर्किए और बांग्लादेश के बीच शिक्षा और हेल्थ सेक्टर में सहयोग बढ़ाने को लेकर गहन चर्चा हो सकती है. बिलाल एर्दोगन कॉक्स बाजार में रोहिंगिया कैंप का दौरा भी करेंगे. कई लोगों का ऐसा भी मानना है कि क्योंकि तुर्किए बांग्लादेश में धार्मिक समूहों का बढ़ावा दे रहा है, इसलिए वह रोहिंग्या कैंप्स का दौरा करेंगे. हालांकि, 17 फरवरी को तारिक रहमान के शपथ ग्रहण में बिलाल एर्दोगन शामिल नहीं हुए थे. तुर्किए की तरफ से उप विदेश मंत्री एंबेसडर बेरिस एकिंसी पहुंची थीं. बिलाल एर्दोगन के इस दौरे को कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुछ खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि TIKA और उससे जुड़े कुछ टर्किश एनजीओ पैन-इस्लामिस्ट विचारधारा को बढ़ावा दे सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि तुर्किए और बांग्लादेश के बढ़ते संबंध तुर्किए-पाकिस्तान-चीन के व्यापक समीकरण भी हो सकते हैं, जो भारत के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश हो सकती है.
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