Holi Folk Song : बिहार की होली केवल रंगों और हुड़दंगों का खेल नहीं, बल्कि उन गीतों(Bhojpuri fagua folk song) की गूँज भी है जो हर बिहारी के रगों में दौड़ता है. जब ढोलक की थाप पर ‘बंगला में उड़ेला अबीर’ के सुर निकलते हैं, तो आँखों के सामने 80 साल के उस वीर योद्धा बाबू कुंवर सिंह(babu veer kunwar singh) की छवि जीवंत हो उठती है, जिन्होंने जगदीशपुर की मिट्टी में गुलाल के साथ आज़ादी का संकल्प घोला था. चलिए जानते हैं बिहार की होली का ये पहलू
बाबू कुंवर सिंह: जब गीतों में जिंदा होती है 1857 की वीरता-
बिहार की होली का एक सबसे खास पहलू यहाँ का प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गीत है, जो 1857 के महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू कुंवर सिंह की होली को समर्पित है. गीत की पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार हैं:
“बंगला में उड़ेला अबीर, अरे लाल, बंगला में उड़ेला अबीर हो बाबू ऽ आहे, बाबू कुंवर सिंह तेगवा बहादुर, बंगला में उड़ेला अबीर”.
यह लोक गीत उस समय की याद दिलाता है जब जगदीशपुर के अपने आवास पर बाबू कुंवर सिंह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ होली मनाते थे. यह वही वीर योद्धा थे, जिन्होंने 80 वर्ष की आयु में भी अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे.
आज भी बिहार के लोग होली खेलते समय अपने इस नायक की वीरता को गीतों के जरिए नमन करते हैं.
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