रांची: झारखंड में सरकारी भर्तियों के एग्जाम में घोटालों के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ गई है और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। इसके अलावा एक और बड़ी खबर ये है कि बीजेपी ने भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की लाठीचार्ज के विरोध में 11 अगस्त (मंगलवार) को झारखंड बंद का आह्वान किया है।
10 अगस्त को क्या-क्या हुआ?
प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स ने सोमवार (10 अगस्त) को झारखंड सरकार को लोकतंत्र की ताकत दिखाई। प्रदर्शनकारी सारी बाधाओं को पार करके झारखंड विधानसभा के परिसर में पहुंच गए। हालांकि छात्रों के साथ नरम रुख अपनाने का दावा करने वाली हेमंत सोरेन की सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की हर संभव कोशिश की।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरीकेड्स लगाए गए, बैरीकेड्स के ऊपर कंटीले तार रखे गए, लाठीचार्ज किया गया, वॉटर कैनन भी चलाया गया और आंसू गैस के गोले भी दागे गए। इस दौरान दर्जनों छात्र घायल हुए, कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं लेकिन प्रदर्शनकारियों के हौसले नहीं टूटे। प्रदर्शनकारियों के हौसले को देखकर हेमंत सरकार प्रेशर में दिखी। जिस वक्त छात्र सड़कों पर थे, उसी वक्त JPSC के चेयरमैन एल ख्यांग्ते की गिरफ्तारी की खबर आ गई।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दोबारा हुआ लाठीचार्ज
झारखंड पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दोबारा लाठीचार्ज किया। असल में पुलिस विधानसभा परिसर में घुसे छात्रों से वापस जाने को कह रही थी। छात्रों ने पुलिस की बात मानी और वो विधानसभा परिसर से बाहर आ गए। लेकिन वापस नहीं गए। वह विधानभवन के गेट नंबर एक के पास धरने पर बैठ गए। स्टूडेंट लीडर्स ने कहा कि वो यहां से तभी हटेंगे, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यहां आकर छात्रों से बात करेंगे।
कुछ देर तक छात्र वहां बैठे रहे लेकिन इसके बाद अचानक पुलिस एक्टिव हुई। स्टूडेंट्स को जबरदस्ती उठाने की कोशिश करने लगी। जब छात्रों ने विरोध किया तो पुलिस ने लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। पुलिस के इस रूख से छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार डंडे के बल पर उनकी आवाज दबाना चाहती है लेकिन अब झारखंड के नौजवान डरने वाले नहीं हैं। अपना हक लेकर ही रहेंगे।
सुबह से लेकर शाम तक पुलिस और छात्रों की बीच रुक-रुककर झड़प
रांची में सोमवार को विधानसभा के आसपास का इलाका दिन भर जंग का मैदान बना रहा। सुबह से लेकर शाम तक पुलिस और छात्रों की बीच रुक-रुककर झड़प होती रही। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सत्रह दिन से धरने पर बैठे छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च की कॉल दी थी। सरकार ने छात्रों की मांगें नहीं मानीं। TDPL कंपनी ने जो एग्जाम कराए उन सारी परीक्षाओं को रद्द करने से इनकार कर दिया। मामले की जांच CBI को सौंपने पर भी सहमति नहीं जताई।
इसलिए आज हजारों स्टूडेंट्स तिरंगा लेकर विधानसभा की तरफ निकल पड़े। हेमंत सोरेन की सरकार ने छात्रों को रोकने के लिए भारी पुलिस तैनात की थी। पुराने विधानसभा से नए विधानसभा भवन तक की दूरी पांच किलोमीटर है। इसी रूट पर छात्रों का मार्च निकलना था। पुलिस ने पांच अलग अलग जगह बैरीकेट्स लगाए। बैरीकेट्स पर कंटीले तारों की बाड़ लगा दी।
सरकार को लग रहा था कि स्टेडियम में धरना देने वाले स्टूडेंट्स की संख्या सैकड़ों में है इसलिए मार्च के दौरान ज्यादा लोग नहीं आएंगे लेकिन उल्टा हुआ। पूरे झारखंड से हजारों स्टूडेंट्स पहुंच गए। प्रदर्शनकारी तीन बैरिकेट्स भी उठाकर ले गए। जब प्रोटेस्टर्स विधानसभा से सिर्फ डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर थे तो पुलिस ने रुख बदला।
छात्र नेता देवेंद्र महतो भी एंबुलेंस में आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे
सोमवार को ही 17 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी एंबुलेंस में आंदोलनकारियों के बीच पहुंच गए। इससे स्टूडेंट्स का जोश बढ़ा। प्रदर्शनकारी विधानसभा की तरफ बढ़ने लगे तो पुलिस ने सख्त रूख अपनाया हालांकि फिर भी छात्र डटे रहे। विधानसभा के गेट नंबर एक के पास पहुंच गए।
छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने सबसे पहले टीयर गैस के गोले दागे। पूरा इलाका धुआं-धुआं हो गया। चूंकि छात्रों को सरकार की तरफ से इस तरह की सख्ती का अंदाजा नहीं था इसलिए उन्होंने बचाव के लिए किसी तरह का इंतजाम नहीं किया। जैसे ही टीयर गैस का धुंआ इलाके में फैला तो प्रदर्शनकारियों का दम घुटने लगा, आंखों में जलन होने लगी। छात्र इधर उधर भागने लगे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मौके पर मौजूद रिपोर्टर्स से पानी की बॉटल लेकर आंख और मुंह धोया।
पुलिस के इस रुख से प्रदर्शनकारियों में जबरदस्त नाराजगी है। पुलिस के रवैये को देखकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत को लेकर जो ट्रस्ट, जो भरोसा बना था, वो टूट गया है। छात्रों पर जुल्म करने वाली झारखंड सरकार से अब कोई बातचीत नहीं होगी। देवेंद्र महतो ने कहा कि अगर इस केस की सही से जांच हुई तो इसकी आंच सीधे मुख्यमंत्री तक जा सकती है।
गौरतलब है कि रांची में इस समय करीब आधा दर्जन छात्र संगठनों के लोग अलग-अलग कैंप लगाकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। हालांकि, आज विधानसभा मार्च के दौरान सभी संगठन एक साथ जा रहे थे। कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े लोग भी प्रोटेस्ट मार्च में शामिल थे। पुलिस की लाठी से वो भी घायल हुए हैं।
राहुल गांधी का भी सामने आया बयान, लाठीचार्ज के खिलाफ दिखे
रांची में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद आखिरकार आज राहुल गांधी को भी झारखंड के मुद्दे पर बोलना पड़ा। कांग्रेस भी झारखंड की गठबंधन सरकार में शामिल है, इसलिए रांची में चल रहे स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अब तक वो बचकर निकल रहे थे, लेकिन राहुल को आज कहना पड़ा कि पीसफुल प्रोटेस्ट पर लाठीचार्ज के वो खिलाफ हैं, फिर चाहे ऐसा करने वाली सरकार किसी भी पार्टी की हो।
पेपर लीक मामलों की जांच करेगी ईडी
हेमंत सोरेन की सरकार CBI से जांच कराने को तैयार नहीं हैं। इसी मुद्दे पर छात्रों के साथ बात अटकी है। लेकिन आज इस मामले में ED की एंट्री भी हो गई है। देश में जितने भी पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, अब उन सारे केसेज की जांच ED करेगी।
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