हरसिंगार में फूल क्यों नहीं आते?
हरसिंगार, जिसे कई लोग पारिजात भी कहते हैं, खुशबू के लिए मशहूर है. आयुर्वेद में भी इसका खास जिक्र मिलता है, लेकिन गार्डनिंग करने वाले अक्सर शिकायत करते हैं कि पौधा लंबा तो हो रहा है, पत्तियां भी घनी हैं, पर फूल नहीं आ रहे. दरअसल, हरसिंगार को ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद मिल जाए तो पत्तियां तो खूब निकलती हैं, मगर फूल कम बनते हैं. फूलों के लिए पोटेशियम जरूरी होता है. मिट्टी में अगर पोटेशियम की कमी है, तो पौधा सिर्फ बढ़त दिखाएगा, खिलावट नहीं. यहीं पर केले के छिलके काम आते हैं. आमतौर पर हम इन्हें कूड़ेदान में फेंक देते हैं, लेकिन यही छिलके पौधे के लिए खजाना हैं.
प्रूनिंग का सही समय
सर्दियों के बाद करें कटाई-छंटाई
फूलों की शुरुआत सही प्रूनिंग से होती है. सर्दियों के खत्म होते ही पौधे की सूखी और पुरानी टहनियां काट दें. इससे नई शाखाएं निकलती हैं और उन्हीं पर कलियां बनती हैं. कटाई के एक हफ्ते बाद मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें. अगर मिट्टी बहुत सख्त हो गई है, तो ऊपर की परत हटाकर थोड़ी नई मिट्टी मिला दें. कई बार लोग सालों तक एक ही मिट्टी में पौधा छोड़ देते हैं, जिससे पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं.
केले के छिलके से बायो एंजाइम कैसे बनाएं?
आसान तरीका, घर में तैयार खाद
-बायो एंजाइम बनाना सुनने में मुश्किल लगता है, लेकिन है बेहद आसान. एक प्लास्टिक की बोतल लें. उसमें पानी भरें और छोटे-छोटे टुकड़ों में कटे केले के छिलके डाल दें. अब इसमें थोड़ा सा गुड़ मिला दें. गुड़ फर्मेंटेशन की प्रोसेस को तेज करता है.
-बोतल का ढक्कन बंद करें, लेकिन गैस निकलने के लिए रोज एक बार ढक्कन हल्का ढीला कर दें. अगर चाहें तो ढक्कन में छोटा छेद भी कर सकते हैं.
-गर्मियों में यह एंजाइम करीब डेढ़ महीने में तैयार हो जाता है, जबकि ठंड में इसे तीन से चार महीने लग सकते हैं. जब पानी का रंग गहरा भूरा हो जाए और छिलके पूरी तरह गल जाएं, तो समझ लें कि एंजाइम तैयार है.
खाद देने से पहले क्या करें?
खाद डालने से एक दिन पहले पौधे में पानी न दें. हल्की सूखी मिट्टी पोषक तत्व बेहतर तरीके से सोखती है. खाद डालने से ठीक पहले मिट्टी को थोड़ा ढीला जरूर करें, ताकि जड़ों तक घोल आसानी से पहुंचे.
एंजाइम घोल डालने का सही तरीका
यह लिक्विड फर्टिलाइजर है, इसलिए इसे सीधे जड़ों में नहीं डालना चाहिए. एक लीटर पानी में इतना ही एंजाइम मिलाएं कि पानी का रंग हल्का बदल जाए. बहुत गाढ़ा घोल पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है. इस घोल को जड़ों के आसपास की मिट्टी में डालें. महीने में दो बार यह प्रक्रिया काफी है. कुछ ही हफ्तों में फर्क दिखने लगेगा-नई कलियां, ताजा पत्तियां और फिर फूल.
पानी और शावरिंग का संतुलन
-हरसिंगार को ज्यादा पानी पसंद नहीं. जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी दिखे, तभी पानी दें, लेकिन पत्तियों पर हल्की शावरिंग रोज की जा सकती है. इससे धूल हटती है और कीड़े भी कम लगते हैं.
-कई घरों में देखा गया है कि लोग रोज भारी पानी दे देते हैं, जिससे जड़ें कमजोर हो जाती हैं. संतुलन ही असली खेल है.
पड़ोस की कहानी से समझिए असर
इंदौर की सीमा शर्मा ने अपने आंगन में दो साल पहले हरसिंगार लगाया था. पौधा बढ़ रहा था, लेकिन फूल नहीं आते थे. उन्होंने केले के छिलके वाला बायो एंजाइम इस्तेमाल करना शुरू किया. तीन महीने बाद पहली बार पौधे पर इतनी कलियां आईं कि सुबह आंगन फूलों से भर गया. उनका कहना है कि अब वे कोई केमिकल फर्टिलाइजर नहीं खरीदतीं.
आखिर में बात सीधी है-हरसिंगार को दिखावे की नहीं, सही पोषण और थोड़ी समझ की जरूरत है. अगर आप प्रूनिंग, मिट्टी की देखभाल और केले के छिलके से बने बायो एंजाइम का तरीका अपनाते हैं, तो आपका पौधा भी खुशबू से घर भर देगा.
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