17 सितंबर को बड़ी मीटिंग
यह पूरा मामला 17 सितंबर की प्रस्तावित बोर्ड की मीटिंग में आएगा। यह मीटिंग ऐसे समय में होने जा रही है। जब आरबीआई से टाटा संस को झटका लगा है। बता दें, टाटा संस के NRC में वेणु श्रीनिवासन सहित तीन सदस्य हैं।
टाटा संस की होगी लिस्टिंग?
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी पंजीकरण वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया है। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की राह खुल गई है। मामले से जुड़े सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई के फैसले की जानकारी टाटा संस के कंपनी सचिव और मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) को शनिवार को मिले पत्र के जरिये दी गई। इसके साथ ही मार्च, 2024 में एनबीएफसी के रूप में पंजीकरण रद्द करने के लिए दिए गए आवेदन का निपटारा हो गया।
इस संबंध में आरबीआई और टाटा संस की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आईपीओ से बचने के लिए टाटा संस ने क्या-क्या किया?
आरबीआई ने सितंबर, 2022 में टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी।
टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी पंजीकरण वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।
जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की परिसंपत्तियों वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की परिसंपत्तियां दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं।
(भाषा के इनपुट के साथ)
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