तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार का पहला कृषि बजट पेश करते हुए राज्य के कृषि मंत्री आर विनोद ने कहा कि यह बजट विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि इसे किसानों की आजीविका और कल्याण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वहीं, विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने बजट को किसानों के लिए निराशाजनक बताते हुए इसकी आलोचना की।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने भी बजट पर सवाल उठाए। मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में फसल उत्पादन के लिए किसानों की अल्पकालिक ऋण जरूरतों को पूरा करने के लिए 17,000 करोड़ रुपये का फसली ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि से जुड़े अन्य कार्यों, जैसे मधुमक्खी पालन, के लिए 3,000 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी ऋण सुविधा भी दी जाएगी।
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उन्होंने बताया कि पात्र किसानों के फसल ऋण माफी के लिए सरकार अब तक कुल 5,267 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। इसमें पहली किस्त के रूप में 100 करोड़ रुपये, दूसरी किस्त में 3,000 करोड़ रुपये, तीसरी किस्त में 1,820 करोड़ रुपये और चौथी किस्त में 347 करोड़ रुपये शामिल हैं। सुपर अल नीनो का उल्लेख करते हुए विनोद ने कहा कि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की कार्ययोजना के आधार पर राज्य में तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि इस मौसमी घटना के कारण पूरे देश में, विशेषकर कुरुवई फसल मौसम (जून-जुलाई और अगस्त की शुरुआत) के दौरान गंभीर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि राज्य के 12 जिलों के अधिक प्रभावित होने का अनुमान है। इसके मद्देनजर सभी जिलों के लिए तैयार कृषि आकस्मिक योजना जिलाधिकारियों को भेज दी गई है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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मंत्री ने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए 600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पांच वर्षीय तमिलनाडु मृदा उर्वरता मिशन शुरू किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में इस मिशन के 10 घटकों पर 122.51 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए पांच वर्षों में 203.64 करोड़ रुपये की लागत से मिशन लागू किया जाएगा।
इसमें दालों के लिए 65.28 करोड़ रुपये और तिलहनों के लिए 138.36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा वर्ष 2026-27 में तमिलनाडु मोटा अनाज (मिलेट) मिशन पर 63.81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए 2026-27 से पांच वर्षीय कॉटन रेनेसां मिशन शुरू किया जाएगा।
पहले वर्ष में 27.21 करोड़ रुपये की लागत से 73,360 एकड़ क्षेत्र में इसे लागू किया जाएगा, जिससे 40,000 कपास किसानों को लाभ मिलने का अनुमान है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की सभी योजनाएं और तकनीकी सलाह एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए आठ एकीकृत कृषि विस्तार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के निर्माण पर केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त निधि से 27.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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कटाई के बाद फसल को बारिश और धूप से बचाने के लिए वर्ष 2026-27 में 43,500 किसानों को तिरपाल वितरित किए जाएंगे, जिसके लिए राज्य सरकार 10 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बजट पेश किए जाने के दौरान मंत्री ने मुख्यमंत्री की प्रशंसा की, जिस पर द्रमुक सदस्यों ने आपत्ति जताई। विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने हस्तक्षेप कर मंत्री से कृषि बजट तक ही सीमित रहने को कहा।
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन ने इसे पूरी तरह निराशाजनक बताया और आरोप लगाया कि सरकार किसानों से किए गए चुनावी वादे पूरे करने में विफल रही है। उन्होंने कावेरी और मेकेदातु मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाए जाने को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
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