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Tamil Nadu Assembly Election: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले खटपट की आहट सामने आने लगी है. सत्तारूढ़ डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग के मुद्दे पर पेच फंस गया है. दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पा रही है.
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले डीएमके और कांग्रेस में ठन गई है.
गठबंधन वार्ता शुरू करने के लिए डीएमके की औपचारिक समिति के गठन में देरी से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और भी नाराज हो गए. 25 जनवरी को दिल्ली में हुई एक बैठक में राहुल ने डीएमके की उप महासचिव कनिमोझी से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए सीटों के बंटवारे पर बातचीत जल्द शुरू करने का आग्रह किया, ताकि बिहार विधानसभा चुनाव जैसी स्थिति दोबारा न पैदा हो, जहां कांग्रेस को 61 सीटों में से केवल छह सीटें ही मिली थीं. डीएमके ने बाद में घोषणा की कि गठबंधन सहयोगियों के साथ बातचीत 22 फरवरी से शुरू होगी. हालांकि, तमिलनाडु में कांग्रेस नेताओं ने जन दबाव तेज कर दिया है.
सरकार में भूमिका की मांग
सांसद मणिकम टैगोर और ज्योतिमणि, पूर्व सांसद विश्वनाथन और पूर्व टीएनसीसी अध्यक्ष केएस अलागिरी ने सरकार में भूमिका की खुले तौर पर मांग की है, यह तर्क देते हुए कि डीएमके के लिए पार्टी के लगातार समर्थन का मतलब सत्ता-साझाकरण होना चाहिए. डीएमके मंत्रियों रघुपाथी और राजकन्नप्पन के कड़े जवाबी बयानों ने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को और गहरा कर दिया है. मुख्यमंत्री स्टालिन की ओर से 11 फरवरी को यह कहने के बावजूद, कि “सत्ता साझा करना तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं है,” बहस शांत नहीं हुई है और दोनों पक्षों के नेता सोशल मीडिया पर तीखी नोकझोंक में लगे हुए हैं.
क्या है रणनीति?
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि गठबंधन की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, पार्टी 1967 के बाद से तमिलनाडु में सत्ता में नहीं रही है. वे ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हैं – 1984 में 61 सीटें, 1991 में 60 सीटें और 2006 में 34 सीटों के बावजूद कांग्रेस सत्ताधारी ढांचे से बाहर रही. 2021 में, डीएमके ने 173 सीटों में से 133 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 25 सीटों में से 18 सीटें जीतकर उच्च सफलता दर दर्ज की. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अब 45 सीटों तक की मांग कर रही है और युवा नेताओं के लिए अधिक अवसर तलाश रही है, साथ ही चेतावनी दे रही है कि असंतोष जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को विजय की टीवीके पार्टी की ओर धकेल सकता है. हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि डीएमके कांग्रेस को अंतिम चरण में समझौता स्वीकार करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से पहले छोटे सहयोगी दलों को सीटें आवंटित करने की रणनीति अपना रही है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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