उधर, नमाज अदा करने आये मुस्लिमों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रेड रोड पर ममता बनर्जी राजनीति करती थीं लेकिन यहां मैदान में अच्छे इंतजाम किये गये थे और यहां नमाज पढ़ कर अच्छा लगा। मुस्लिमों ने तो यहां तक कह दिया कि हम सभी का आह्वान करते हैं कि आने वाले चुनावों में भाजपा को ही वोट दिया जाये। मुस्लिमों ने कहा कि हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं और हम कानून का पालन करने वाले लोग हैं।
इसे भी पढ़ें: Bangladeshi Infiltrators के बीच मची भगदड़, Suvendu Adhikari की सख्ती से India-Bangladesh Border पर हड़कंप, बड़ी संख्या में जुटे घुसपैठिये
हम आपको बता दें कि शुभेन्दु अधिकारी सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि नमाज सड़कों पर पढ़ने की इजाजत नहीं दी जायेगी और लाउडस्पीकर की आवाज धार्मिक परिसरों से बाहर नहीं जानी चाहिए और किसी भी हालत में सड़कें बाधित नहीं होनी चाहिए। यह फैसला उस बहस के बीच आया है जिसमें लंबे समय से आम नागरिकों की परेशानी, यातायात अवरोध और सार्वजनिक असुविधा के मुद्दे उठते रहे हैं।
इतिहास पर नजर डालें तो ईद की यह जमात पहले शाहिद मीनार मैदान में आयोजित होती थी। वर्ष 1919 में मैदान में जलभराव होने के बाद इसे रेड रोड स्थानांतरित किया गया था। तब से लेकर अब तक रेड रोड ही इस विशाल धार्मिक आयोजन का केंद्र बना रहा। केवल कोरोना काल में ही इस परंपरा में व्यवधान आया था। लेकिन अब एक बार फिर इतिहास ने करवट ली है और शहर ने नई व्यवस्था को स्वीकार किया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र में धार्मिक आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन कानून व्यवस्था और आम जनता की सुविधा उससे कम महत्वपूर्ण नहीं हो सकती। पश्चिम बंगाल में इस बार ईद केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था की नई मिसाल बनकर सामने आई। दशकों बाद सड़कें जाम नहीं हुईं, यातायात सामान्य रहा और धार्मिक आयोजन भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। यही वह संतुलन है जिसकी मांग लंबे समय से उठती रही थी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.