Last Updated:
Separatist Leader Shabir Ahmed Shah: सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग मामले में जमानत दी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी को आधार बनाकर शाह को यह राहत दी.
सुप्रीम कोर्ट ने अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को बड़ी राहत दी है.
मामले में करीब 400 गवाह हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ 15 की गवाही पूरी हुई है. सीनियर एडवोकेट कोलिन गोंसल्वेस ने शाह की ओर से दलील दी कि आरोप मुख्य रूप से 1990 के दशक की पुरानी स्पीच पर आधारित हैं और नए ठोस सबूत नहीं हैं. एनआईए ने आरोप लगाया था कि शाह जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में शामिल थे. वे अलगाववादी नेटवर्क को मजबूत करने और हवाला चैनलों व एलओसी ट्रेड के जरिए फंडिंग में शामिल थे, जो सड़क विरोध प्रदर्शनों और उग्रवादी गतिविधियों को समर्थन देती थी.
सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शाह का नाम शामिल हुआ
एनआईए ने 4 अक्टूबर 2019 को दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शाह को शामिल किया था. एजेंसी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और शाह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या समान गतिविधियां दोहरा सकते हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए से कई सवाल किए. कोर्ट ने पूछा कि 1990 के दशक की पुरानी स्पीच और बयानों पर अब कैसे भरोसा किया जा सकता है? छह साल से ज्यादा हिरासत का क्या ठोस आधार है? फरवरी 2026 में कोर्ट ने एनआईए को पुराने सबूतों के बजाय समकालीन और नए प्रमाण पेश करने को कहा था. कोर्ट ने ट्रायल की अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए और देरी को अनुचित बताया.
दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें कहा गया था कि आरोप गंभीर हैं और ट्रायल चल रहा है, इसलिए देरी का हवाला नहीं दिया जा सकता. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लंबी हिरासत, उम्र और ट्रायल की धीमी प्रगति को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की. जमानत पर सख्त शर्तें लगाई गई हैं. शाह जेल से बाहर रहते हुए किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे, ट्रायल में पूरा सहयोग करेंगे और अन्य निर्देशों का पालन करेंगे. कोर्ट ने कहा कि विस्तृत आदेश बाद में जारी होगा. शाह जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के नेता हैं और लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन से जुड़े रहे हैं.
About the Author

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.