वैवाहिक विवाद के दौरान पत्नियों की तरफ से पति के दफ्तर में शिकायत करने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. जस्टिस बी वी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आखिर इससे क्या हासिल होता है? पति की नौकरी छीनकर क्या मिलेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की वह गाजियाबाद के एक दंपति से जुड़ा है. दोनों के बीच तलाक का मामला लंबित है. उन्होंने एक दूसरे के खिलाफ कई और केस भी दर्ज करवा रखे हैं. इनमें से एक केस मानहानि का भी है. उस केस को गाजियाबाद ट्रांसफर करवाने के लिए महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
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पति ने मानहानि का यह मुकदमा कब दर्ज किया?
वायु सेना में काम करने वाले पति ने मानहानि का यह मुकदमा तब दर्ज करवाया, जब पत्नी ने उसके खिलाफ वायु सेना मुख्यालय में एक शिकायत दी. पत्नी ने उसपर नौकरी पर रहते हुए व्यापार करने का आरोप लगाते हुए मुख्यालय में एक ज्ञापन दिया. इसे अपनी मानहानि बताते हुए पति ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया. पत्नी का कहना है कि पति ने अपने एक दोस्त के जरिए उस पर कई झूठे केस करवा रखे हैं. उनमें से एक केस वायु सेना से पति को मिले हेलमेट की चोरी का भी है. इस मामले में उसके भाई को भी आरोपी बनाया गया है. महिला के वकील ने जजों को बताया कि वायु सेना मुख्यालय जाने के पीछे उसका मकसद इस बारे में जानकारी जुटाना था.
जस्टिस नागरत्ना ने दोनों पक्षों से क्या कहा?
जस्टिस नागरत्ना ने दोनों पक्षों से कहा कि आप तलाक के लिए पहले से लड़ रहे हैं. फिर एक दूसरे के खिलाफ अलग से कई तरह की कार्रवाई क्यों कर रहे हैं? आप लोगों को एक दूसरे के खिलाफ दर्ज करवाए गए बाकी मुकदमे वापस लेने पर विचार करना चाहिए. सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वैवाहिक विवाद में पत्नियों को गुजारा भत्ते की ज़रूरत पड़ती है. बाद में एकमुश्त सेटलमेंट भी होता है. ऐसे में पति की आमदनी का जरिया खत्म कर देने की कोशिश करना समझ से परे है. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुलह के लिए अपने मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया. कोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्ष मध्यस्थ की मौजूदगी में समाधान निकालने का प्रयास करें. अगर विवाद नहीं सुलझता है तो फिर आगे सुनवाई की जाएगी.
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