बटालियन अंडर ऑफिसर स्पर्श छेत्री के लिए सेना की वर्दी पहनना चौथी पीढ़ी की गौरवशाली सैन्य विरासत को आगे बढ़ाने जैसा स्वाभाविक कदम था। बता दें कि उनके परदादा ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सेवा दे चुके हैं।
कौन हैं स्पर्श छेत्र
जी हां, बटालियन अंडर ऑफिसर स्पर्श छेत्री के लिए सेना की वर्दी पहनना चौथी पीढ़ी की गौरवशाली सैन्य विरासत को आगे बढ़ाने जैसा स्वाभाविक कदम था। बता दें कि उनके परदादा ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सेवा दे चुके हैं। उनके दादा और पिता इन्फैंट्री ऑफिसर रहे हैं, जबकि मां आर्मी एजुकेशनल कॉर्प्स में रहीं हैं। अब वे अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए सेना में सेवा करने में जुट गए हैं।
आर्मी के लिए छोड़ी लाखों जॉब
स्पर्श छेत्री के लिए आर्मी में ऑफिसर बनना आसन नहीं था। क्योंकि इन्होंने अपनी मंजिल कुछ और ही चुनी थी। लेकिन सेवा सेवा ही उनका मंजिल था, ये बात तब पता चली, जब उन्होंने लाखों की जॉब को छोड़ी। जी हां, अपनी स्कूलिंग खत्म करने के बाद स्पर्श छेत्री ने थापर यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट किया। इसके बाद उन्होंने एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर डेटा एनालिस्ट के तौर पर काम किया।
स्टोरी सोशल मीडिया पर हुई वायरल
बता दें कि स्पर्श छेत्री की कहानी भारतीय सेना की आर्मी ट्रेनिंग कमांड ने सोशल मीडिया पर शेयर की है। तब से इनकी स्टोरी काफी वायरल हो रही है। है। स्पर्श बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं और खेलों से लेकर एनसीसी तक कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं। वे राष्ट्रीय स्तर के घुड़सवारी पदक विजेता रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने जिला स्तर पर बैडमिंटन और तैराकी में भी पदक जीते हैं। वह एनसीसी के पूर्व अंडर ऑफिसर होने के साथ-साथ बेहतरीन निशानेबाज भी रहे हैं।
बता दें कि अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (OTA), गया में प्रशिक्षण के दौरान भी स्पर्श ने अपनी असाधारण नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने आराम और सुख-सुविधाओं से भरी जिंदगी के बजाय उद्देश्यपूर्ण जीवन को चुना और सेना में सेवा करने का फैसला किया। चार पीढ़ियों से चली आ रही सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए स्पर्श अब भारतीय सेना के साहस, चरित्र और अटूट प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपने जीवन में उतार रहे हैं। उनकी कहानी युवाओं के लिए मेहनत, समर्पण और देशसेवा की प्रेरणा बन रही है।
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