Pm svanidhi yojana : आज आपको एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं जो कोरोना महामारी के दौरान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे थे. लेकिन रोहित ने पीएम स्वनिधि योजना का लाभ लेकर न केवल अपने व्यवसाय को पुनर्जीवित किया, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का भरण-पोषण भी सुनिश्चित किया है. पीएम स्वनिधि योजना से कैसे बदली रोहित की जिंदगी? आइए जानते हैं.
रोहित लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि वह पहले शटरिंग यानि लकड़ी की बनी बल्ली जैसे सामान बेचने का छोटा सा धंधा करते थे. लेकिन लॉकडाउन में ये धंधा चलना भी मुश्किल हो गया. इसी दौरान रोहित ने दूसरे बिजनेस का भी सोचा लेकिन लॉकडाउन में आर्थिक हालत भी खराब थी. बारीगढ़ में कैंप लगाया गया था तो यहां से रोहित को पीएम स्वनिधि योजना के बारे में पता चला तो उन्होंने नगर पंचायत में जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए. 7 दिन बाद ही उनके बैंक खाते में 10 हजार रुपए क्रेडिट कर दिए गए. लॉकडाउन जैसे कठिन समय में 10 हजार रुपए भी उनके लिए लाख रुपए के सामान थे.
दूसरी किश्त में 20 हजार रुपए
रोहित ने जब 10 हजार रुपए का लोन चुका दिया तब उन्हें फिर से 20 हजार रुपए का लोन दिया गया. रोहित ने इस रकम से दुकान को और बढ़ाया. रोहित ने इस लोन को भी छोटी-छोटी रकम की किश्तों में चुका दिया. रोहित का कहना है कि इस लोन में ब्याज नाममात्र का लगता है. इसलिए लोन चुकाना बहुत आसान होता है.
तीसरी किश्त में 50 हजार रुपए का लोन
रोहित बताते हैं कि घर की कुछ पूंजी और पीएम स्वनिधि की तीसरी किश्त 50 हजार रुपए की मिल गई जिससे मैंने अपनी दुकान में वह सब सामान रखा जो ग्रामीण और कस्बों के इलाके में खरीदा जाता है.
योजना के माध्यम से रोहित को तीनों चरणों में ऋण(लोन) प्राप्त हुआ. इस कार्यशील पूंजी से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आज वे अपने परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से कर पा रहे हैं. रोहित ने योजना का लाभ लेकर न केवल अपने व्यवसाय को पुनर्जीवित किया, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का भरण-पोषण भी सुनिश्चित किया है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई पीएम स्वनिधि योजना को दिया है.
बता दें, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने कोरोना महामारी से प्रभावित छोटे व्यापारियों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है. कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में जिले में पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को योजनाबद्ध रूप से लाभांवित किया जा रहा है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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