जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्र ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के हालिया फैसले के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी और उनके मीडिया समूह टीवी18 पर मामले को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। हालांकि, रिलायंस समूह ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने सुभाष चंद्र की व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया में ऐसी पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत लेनदारों को करीब 6.5 करोड़ रुपये मिलने हैं। यह रकम उनके खिलाफ स्वीकार किए गए करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के दावों की तुलना में बेहद कम है। इसी बड़े अंतर को लेकर यह मामला चर्चा में आया है।
हालांकि, सुभाष चंद्र का कहना है कि 22,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा उनकी व्यक्तिगत देनदारी के रूप में पेश करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इन कर्जों के सीधे उधारकर्ता नहीं थे, बल्कि एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के व्यक्तिगत गारंटर थे।
28 अगस्त को जारी अपने एक वीडियो बयान में चंद्र ने कहा कि व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर उनके खिलाफ वास्तविक दावे करीब 3,992 करोड़ रुपये के थे। इनमें से 620 करोड़ रुपये का निपटारा पहले ही हो चुका है, जबकि संबंधित कंपनियों की ओर से 1,063 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने की पेशकश की गई है। चंद्र के मुताबिक, जिन कंपनियों के कर्ज की उन्होंने गारंटी दी थी, वे अब तक करीब 43,000 करोड़ रुपये चुका चुकी हैं।
इसके बाद जारी दूसरे वीडियो में चंद्र ने सीधे मुकेश अंबानी और रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी18 और उसके समाचार माध्यमों ने उनकी दिवाला प्रक्रिया को लेकर ऐसी खबरें प्रकाशित कीं, जिनसे यह धारणा बनी कि 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज महज 6.5 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया है।
चंद्र ने यह भी दावा किया कि उनके एक परिचित ने मीडिया समूह के प्रधान संपादक से बातचीत की थी और वहां से उन्हें ऊपर से मिले निर्देशों का हवाला दिया गया। इसके बाद उन्होंने अंबानी से संपर्क करने की कोशिश की और उन्हें पत्र भी लिखा।
रिलायंस समूह ने इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुभाष चंद्र की टिप्पणियां निराधार हैं। कंपनी ने कहा कि उसके मीडिया संस्थानों का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है और आगे भी ऐसा नहीं होगा।
चंद्र ने पुराने विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने 2019 में जी के शेयर मूल्य में आई बड़ी गिरावट को लेकर कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सैकड़ों बेनामी कंपनियों के जरिए कथित तौर पर शेयर मूल्य को प्रभावित किया गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के फैसले को लेकर कानूनी विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। केनरा बैंक ने इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की है। ऐसे में 6.5 करोड़ रुपये वाली पुनर्भुगतान योजना पर आगे भी न्यायिक समीक्षा जारी रहने की संभावना है।
बता दें कि सुभाष चंद्र ने अपने समूह पर करीब 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज होने की बात कही है और दावा किया है कि संपत्तियां बेचकर 43,000 से 45,000 करोड़ रुपये तक चुकाए जा चुके हैं। अब इस पूरे विवाद में न्यायाधिकरण की आगे की कार्रवाई और पक्षों के दावों पर होने वाली कानूनी जांच अहम रहने वाली है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.